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तीर्थन घाटी की पंचायतों ने इको-टूरिज्म के लिए विशेष नीति की मांग उठाई।


फ्रंट पेज न्यूज़,बंजार, कुल्लू।


विश्व प्रसिद्ध तीर्थन घाटी की पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका को संतुलित ढंग से बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार से इको-टूरिज्म के लिए विशेष नीति बनाने की मांग की है। प्रतिनिधियों का कहना है कि तीर्थन घाटी प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध क्षेत्र है, लेकिन सीमित प्राकृतिक संसाधनों के कारण यहां विकास योजनाओं को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप लागू करने की आवश्यकता है।

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जनप्रतिनिधियों ने कहा कि तीर्थन घाटी की लगभग 10 पंचायतों की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार पर्यटन है। पिछले कुछ वर्षों में यहां पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिले हैं।

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हालांकि, बढ़ते पर्यटन दबाव के कारण पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि तीर्थन घाटी के लिए एक अलग और व्यवहारिक इको-टूरिज्म नीति तैयार की जाए, जिसमें स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित हो तथा पर्यटन गतिविधियों का संचालन पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप किया जाए।

प्रतिनिधियों का मानना है कि ऐसी नीति से क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
जनप्रतिनिधि नीरज ठाकुर ने कहा कि तीर्थन घाटी की भौगोलिक परिस्थितियां प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से भिन्न हैं। यहां सीमित भूमि, वन क्षेत्र और जल संसाधनों को ध्यान में रखते हुए विकास योजनाओं का निर्माण किया जाना चाहिए।

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उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे कानून और नीतियां बनानी चाहिए जो स्थानीय लोगों के अधिकारों और हितों की रक्षा करते हुए सतत विकास को बढ़ावा दें।
प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों और सुझावों का एक विस्तृत प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजा है। यह प्रस्ताव राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू तक पहुंचाया गया है।

प्रस्ताव में स्थानीय लोगों को पर्यटन गतिविधियों में प्राथमिकता, होम-स्टे संचालन के लिए सरल नियम, कचरा प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था, ट्रेकिंग मार्गों का वैज्ञानिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इको-टूरिज्म नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो तीर्थन घाटी प्रदेश में सतत पर्यटन का एक आदर्श मॉडल बन सकती है। इससे न केवल क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।

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