हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक संगीत और पारंपरिक विरासत को नई पहचान दिलाने वाले प्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत सिंह को प्रदेश के राज्यपाल Kavinder Gupta द्वारा प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने इंद्रजीत सिंह के सांस्कृतिक योगदान की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मधुर गायिकी और लोकधुनों के माध्यम से हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का उल्लेखनीय कार्य किया है।
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प्रशस्ति-पत्र में राज्यपाल ने कहा कि इंद्रजीत सिंह ने न केवल प्रदेश की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का कार्य किया है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक संस्कृति से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उनके गीतों में हिमाचल की मिट्टी की खुशबू, लोकजीवन की सरलता और मानवीय संवेदनाओं की गहरी अभिव्यक्ति झलकती है। राज्यपाल ने विशेष रूप से उन दुर्लभ लोकगीतों और पारंपरिक धुनों के पुनर्जीवन के लिए इंद्रजीत सिंह के प्रयासों को सराहनीय बताया, जो समय के साथ विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रहे थे।
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उन्होंने कहा कि इंद्रजीत सिंह की कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक गौरव, सामाजिक जागरूकता और सकारात्मक चेतना का प्रभावशाली संदेश भी देती है। प्रशस्ति-पत्र में राज्य पक्षी मोनाल के संरक्षण तथा पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में भी इंद्रजीत सिंह के योगदान का उल्लेख किया गया है।
राज्यपाल ने कहा कि लोक कलाकार ने अपनी रचनात्मकता और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से लोगों को प्रकृति एवं संस्कृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया है। राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि इंद्रजीत सिंह भविष्य में भी अपनी कला और लोकसंगीत के माध्यम से हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करते रहेंगे।
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उन्होंने कहा कि कलाकार की प्रतिभा, समर्पण और अनुशासित साधना ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। इस अवसर पर सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने भी इंद्रजीत सिंह को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक कलाकार का नहीं, बल्कि हिमाचल की लोक संस्कृति और लोक परंपराओं का सम्मान है।