फ्रंट पेज न्यूज़, (छविंदर शर्मा)आनी।
आनी क्षेत्र में आयोजित बी माता के पावन धार्मिक उत्सव का समापन सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ हुआ। सोलह दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन के अंतिम दिन विधिवत पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बी माता की प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
स्थानीय परंपरा के अनुसार बी माता का यह पर्व ब्राह्मण परिवारों की उन विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है जिन्हें संतान सुख प्राप्त हुआ है। सोलह दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में महिलाएं विशेष पूजा-अर्चना कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

विसर्जन से पूर्व श्रद्धालुओं ने माता को फल, फूल, सिंदूर और नैवेद्य अर्पित कर विशेष पूजा की। इसके बाद ढोल-नगाड़ों, झाल तथा भक्ति संगीत की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालु माता के जयकारे लगाते हुए विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। महिलाओं ने पारंपरिक लोकभजन और देवी गीत गाकर वातावरण को पूर्णतः भक्तिमय बना दिया।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार माता से पूजा-अर्चना में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना की गई तथा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ समस्त अनुष्ठान संपन्न किए गए। श्रद्धालुओं ने बी माता से क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति, खुशहाली और परिवारों के कल्याण की प्रार्थना की।

यह धार्मिक उत्सव आनी क्षेत्र के थबोली, रिवाड़ी, ठोगी-शमेशा, जलोड़ी वटाला, ओलवा, रों, चोपल, गुहान, कराणा सहित आनी से सटे तुमन, कनेऊग, चखाना, बखोन और अन्य गांवों में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा धारण कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेती हैं।

विसर्जन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। बी माता रानी के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विदाई देते हुए माता से अगले वर्ष पुनः आगमन का आशीर्वाद मांगा।

















