फ्रंट पेज न्यूज़ (छविंदर शर्मा)आनी।
शिमला, 13 मई : वर्तमान दौर में तेजी से बदलती जीवनशैली और आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों के सर्वांगीण विकास में मूल्य आधारित शिक्षा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अलका भारद्वाज ने कहा कि आज बच्चों के हाथों में किताबों से पहले मोबाइल फोन पहुंच रहा है और उन पर पढ़ाई के साथ-साथ आगे बढ़ने का मानसिक दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में यह आवश्यक हो गया है कि बच्चों को केवल सफल ही नहीं, बल्कि एक अच्छा इंसान भी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि मूल्य आधारित शिक्षा बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझाने का कार्य करती है। यह शिक्षा उन्हें ईमानदारी, अनुशासन, दूसरों के प्रति सम्मान और जरूरतमंदों की सहायता जैसे मानवीय गुणों के महत्व से परिचित कराती है। यही संस्कार आगे चलकर उनके व्यक्तित्व की पहचान बनते हैं।

अलका भारद्वाज ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चे ज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में काफी आगे हैं, लेकिन कई बार भावनात्मक समझ और सामाजिक व्यवहार में कमी देखने को मिलती है। सोशल मीडिया और दूसरों से तुलना की बढ़ती प्रवृत्ति बच्चों पर मानसिक दबाव डाल रही है। ऐसे में मूल्य शिक्षा उन्हें सही दिशा देने और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होती है।

उन्होंने स्कूलों और शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। उनके व्यवहार और विचारों का बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। विद्यालयों में कहानियों, सांस्कृतिक गतिविधियों और सकारात्मक वातावरण के माध्यम से बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मूल्य शिक्षा का वास्तविक प्रभाव बच्चों के व्यवहार में दिखाई देता है, जब वे दूसरों की सहायता करते हैं, अपनी गलतियों को स्वीकारते हैं और समाज में सौहार्दपूर्ण व्यवहार अपनाते हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों में अच्छे संस्कार और मानवीय मूल्यों का विकास भी उतना ही जरूरी है। जीवन में वास्तविक सफलता उसी व्यक्ति को मिलती है, जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ एक अच्छा इंसान भी हो।


















