मुख्य संपादक प्रमेश मेश शर्मा की कलम से
देशभर में 20 मई 2026, बुधवार को दवा विक्रेता और केमिस्ट एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। यह बंद “ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD)” के आह्वान पर किया जा रहा है, जिसका समर्थन हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट संगठनों ने किया है।

हड़ताल के दौरान अधिकांश निजी मेडिकल स्टोर बंद रहने की संभावना है, हालांकि अस्पतालों की आपातकालीन दवा सेवाएं खुली रह सकती हैं।
संगठन की ओर से जारी पोस्टर और जानकारी के अनुसार यह आंदोलन ऑनलाइन दवाइयों की बिक्री, बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा भारी छूट (डीप डिस्काउंटिंग), नकली एवं अवैध दवाओं की बिक्री तथा दवा कारोबार में बढ़ते कॉरपोरेट हस्तक्षेप के विरोध में किया जा रहा है। संगठन ने कोविड काल में जारी जीएसआर 220(E) अधिसूचना को वापस लेने की मांग भी उठाई है।
दवा विक्रेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल मेडिकल व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पारंपरिक आर्थिक व्यवस्था, छोटे व्यापारियों के अस्तित्व और आर्थिक संतुलन से भी जुड़ा हुआ विषय है। उनका मानना है कि ऑनलाइन व्यवस्था और बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बढ़ते प्रभाव ने छोटे दुकानदारों, स्थानीय व्यापारियों और पारंपरिक बाजार व्यवस्था पर गहरा असर डाला है।
व्यापार संगठनों का तर्क है कि पहले किसी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों से उत्पन्न धन छोटे दुकानदारों, कर्मचारियों, परिवहन, स्थानीय सप्लायरों और अन्य सेवा क्षेत्रों में वितरित होता था, जिससे आर्थिक विकेंद्रीकरण बना रहता था। लेकिन अब धीरे-धीरे व्यापार और उपभोक्ता बाजार कुछ बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों और चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथों में केंद्रित होता जा रहा है। इससे छोटे कारोबार कमजोर हो रहे हैं और कई स्थानों पर बंद होने की स्थिति तक पहुंच रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार यदि यही स्थिति लगातार बढ़ती रही तो भविष्य में बाजार व्यवस्था पर कुछ बड़ी कंपनियों का एकाधिकार स्थापित हो सकता है, जिससे रोजगार के अवसर कम होंगे और आम लोगों की निर्भरता केवल बड़े कॉरपोरेट समूहों पर बढ़ जाएगी। उनका कहना है कि आर्थिक व्यवस्था का स्वस्थ स्वरूप वही होता है जिसमें छोटे, मध्यम और स्थानीय व्यवसायों की भागीदारी बनी रहे और धन का प्रवाह समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचे।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि छोटे व्यापार केवल आर्थिक इकाइयां नहीं होते, बल्कि वे स्थानीय रोजगार, सामाजिक संतुलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। छोटे बाजारों और पारंपरिक दुकानों के कमजोर होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रभावित होते हैं, जिसका असर युवाओं और निम्न आय वर्ग पर अधिक पड़ता है।
AIOCD और विभिन्न राज्य स्तरीय संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य तकनीक का विरोध करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यापारिक व्यवस्था की मांग करना है जिसमें छोटे कारोबारी भी सुरक्षित रह सकें और बाजार पूरी तरह कुछ बड़े कॉरपोरेट घरानों के नियंत्रण में न चला जाए। संगठन इसे “आर्थिक विकेंद्रीकरण” को बचाने की लड़ाई बता रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश सोसायटी ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट अलायंस के प्रदेश अध्यक्ष संजीव पंडित तथा महासचिव रिशव कालिया ने सभी दवा विक्रेताओं से बंद को सफल बनाने की अपील की है।
उन्होंने आम जनता से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि लोग अपनी नियमित उपयोग की आवश्यक दवाइयां पहले ही खरीद लें ताकि किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।





















