फ्रंट पेज न्यूज़,कुल्लू।
हिमाचल प्रदेश पेंशनभोगी संघ का प्रदेश स्तरीय महाधिवेशन आगामी 26 जून 2026 को कुल्लू स्थित फैडरल हाउस, अटल सदन में आयोजित किया जाएगा। महाधिवेशन की अध्यक्षता संघ के प्रदेशाध्यक्ष एल.आर. गुलशन करेंगे। बैठक प्रातः 11 बजे आरंभ होगी, जिसमें प्रदेश भर से पेंशनभोगी प्रतिनिधि और संगठन पदाधिकारी भाग लेंगे।

संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार, प्रदेश महासचिव मिलाप चंद, प्रदेश उपाध्यक्ष खुशहाल चंद नेगी, महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष लीला डोगरा, महिला विंग की प्रदेश उपाध्यक्ष चिंतपूर्णा शर्मा, संगठन सचिव मनोरमा डोगरा, जिला कुल्लू पेंशनभोगी संघ के अध्यक्ष दयाल सिंह ठाकुर तथा महासचिव खेम सिंह हांडा सहित अनेक पेंशनर नेताओं ने बताया कि महाधिवेशन में पेंशनरों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बैठक के उपरांत उपायुक्त कुल्लू के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।

प्रदेश सरकार पर उपेक्षा का आरोप
प्रदेशाध्यक्ष एल.आर. गुलशन ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पिछले लगभग चार वर्षों से पेंशनरों के हितों की लगातार अनदेखी कर रही है, जिससे बुजुर्ग एवं बीमार पेंशनरों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पेंशनर संगठन कई बार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात कर अपनी वित्तीय देनदारियों के भुगतान की मांग उठा चुका है। इसके अतिरिक्त प्रदेशभर में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन भी किए गए, लेकिन अभी तक लंबित भुगतान के संबंध में कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।


लंबित देनदारियों के भुगतान की मांग
संघ ने सरकार से एकमुश्त भुगतान की मांग करते हुए कहा कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तथा उसके बाद सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों के संशोधित वेतनमान के एरियर, संशोधित रिटायरमेंट ग्रेच्युटी, पेंशन कम्युटेशन, लीव इनकैशमेंट, जुलाई 2022 से लंबित 15 प्रतिशत महंगाई भत्ते की पांच किस्तों, जनवरी 2022 से देय महंगाई भत्ते के बकाया एरियर तथा लंबित मेडिकल बिलों का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। संगठन का दावा है कि इन लंबित देनदारियों से प्रदेश के लगभग 1.80 लाख पेंशनर प्रभावित हैं।

पेंशनभोगी संघ के नेताओं ने कहा कि हाल ही में हुए पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में कर्मचारियों और पेंशनरों की नाराजगी स्पष्ट रूप से देखने को मिली है।


उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार का कर्मचारियों और पेंशनरों के प्रति रवैया इसी प्रकार उदासीन बना रहा, तो आगामी विधानसभा चुनावों में प्रदेश के लगभग साढ़े तीन लाख कर्मचारियों और पेंशनरों की नाराजगी राजनीतिक परिणामों को प्रभावित कर सकती है।

संघ ने कहा कि 26 जून को होने वाला महाधिवेशन पेंशनरों की लंबित मांगों और भविष्य की रणनीति तय करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होगा तथा इसके माध्यम से सरकार पर लंबित वित्तीय दायित्वों के शीघ्र निपटारे के लिए दबाव बनाया जाएगा।













