फ्रंट पेज न्यूज़,बंजार।
क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के लक्ष्य को साकार करने के लिए सिविल अस्पताल बंजार द्वारा खंड के दूरदराज़ गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।

भारत सरकार के 100 डे टीबी कैंपेनिंग के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं तथा संभावित टीबी रोगियों की पहचान के लिए निःशुल्क एक्स-रे और अन्य आवश्यक परीक्षण किए जा रहे हैं।

इसी कड़ी में ग्राम पंचायत शिल्ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष शिविर आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 70 लोगों के छाती के एक्स-रे किए गए। शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को टीबी के लक्षणों, बचाव और समय पर उपचार के महत्व के बारे में भी जागरूक किया गया।

खंड चिकित्सा अधिकारी बंजार डॉ. नीलम शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत टीबी को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा संभावित रोगियों की शीघ्र पहचान के लिए चिकित्सा दल गांवों तक पहुंच रहा है। इससे लोगों को अस्पतालों तक आने की आवश्यकता कम हो रही है और समय रहते जांच एवं उपचार सुनिश्चित हो रहा है। दो

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे माह विभिन्न पंचायतों और दुर्गम गांवों का दौरा करेंगी। अभियान के दौरान टीबी के संदिग्ध मरीजों की पहचान कर उनके एक्स-रे, बलगम जांच तथा अन्य आवश्यक परीक्षण निःशुल्क किए जा रहे हैं। साथ ही रोगियों को उपचार एवं पोषण सहायता योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है।

यह शिविर बीएमओ डॉ. नीलम शर्मा के दिशा-निर्देशों तथा डॉ. घनश्याम शर्मा के नेतृत्व में आयोजित किया गया। शिविर में एक्स-रे तकनीशियन चंदे राम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) अंबिका शर्मा तथा स्थानीय आशा कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी, वजन कम होना, बुखार या रात को अत्यधिक पसीना आने जैसे लक्षण हों तो वह जांच अवश्य करवाए। समय पर पहचान और नियमित उपचार से टीबी पूरी तरह ठीक की जा सकती है।

स्वास्थ्य विभाग का यह अभियान न केवल टीबी रोगियों की शीघ्र पहचान में सहायक सिद्ध हो रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और लोगों में जागरूकता फैलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
















