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जाति प्रमाण पत्र पुराना होने पर नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता : हाईकोर्ट


 

फ्रंट पेज न्यूज़,शिमला।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल जाति प्रमाण पत्र के पुराने होने के आधार पर किसी प्रत्याशी का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि प्रमाण पत्र जारी होने की तिथि से उसकी वैधता समाप्त नहीं होती और पुराने होने मात्र से उसका कानूनी महत्व खत्म नहीं माना जा सकता।

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मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने रिटर्निंग अधिकारी के निर्णय को असंगत बताते हुए कहा कि नामांकन पत्र खारिज करने का आधार विधिसम्मत होना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक उसकी वैधता बनी रहती है।

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जानकारी के अनुसार, एक प्रत्याशी का नामांकन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया था कि उसका जाति प्रमाण पत्र पुराना है। इसके खिलाफ प्रत्याशी ने हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत केवल प्रमाण पत्र के पुराने होने को नामांकन निरस्त करने का आधार बनाया जा सके।

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हाईकोर्ट ने संबंधित रिटर्निंग अधिकारी को कानून के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत की इस टिप्पणी को चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रत्याशियों के अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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उल्लेखनीय है कि नगर पंचायत बंजार में भी जाति प्रमाण पत्र को लेकर इस तरह का गतिरोध आया था लेकिन इस निर्णय से  स्पष्ट हो गया है कि रिटर्निंग अधिकारी का कार्य वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप था।

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