थर्ड पेज न्यूज़ ( प्रमेश शर्मा )बंजार/कुल्ल
आज संपूर्ण देश सहित विश्वभर में Buddha Purnima श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। यह पावन दिवस Gautama Buddha के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—तीनों की स्मृति में समर्पित है। इस अवसर पर बौद्ध स्थलों, मठों और मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं, ध्यान-साधना और दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के माध्यम से मानवता को अहिंसा, करुणा और सत्य का मार्ग दिखाया। उनका उपदेश था कि मनुष्य अपने विचारों और कर्मों से ही अपने जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है। आज के दौर में, जब समाज विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहा है, बुद्ध का संदेश और भी प्रासंगिक हो उठता है।
बुद्ध पूर्णिमा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मबोध का अवसर भी है। इस दिन लोग अपने भीतर झांककर जीवन के मूल्यों को समझने और अपनाने का प्रयास करते हैं। ध्यान, दान और सेवा के माध्यम से आत्मा की शुद्धि का संदेश दिया जाता है।
देश के प्रमुख बौद्ध स्थलों—विशेषकर बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर में भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, भंडारे और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।
यह पर्व समाज में भाईचारे, प्रेम और एकता का संदेश भी देता है। बुद्ध के उपदेश हमें सिखाते हैं कि सभी प्राणियों के प्रति दया और सम्मान का भाव रखें तथा जीवन को सरल, संतुलित और सकारात्मक बनाएं।
बुद्ध पूर्णिमा हमें यह सिखाती है कि सच्ची खुशी बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और संतोष में निहित है। आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें और अपने जीवन को करुणा, शांति और सद्भाव से आलोकित करें।
“अतीत में मत उलझो, भविष्य की चिंता मत करो, वर्तमान में जियो।” – Gautama Buddha.












