फ्रंट पेज न्यूज़, बंजार (कुल्लू)
हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा सड़क और परिवहन व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से चुनावों को लगभग छह माह आगे बढ़ाया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। चुनाव टाले जाने के बावजूद अब लगभग दस माह का समय बीत चुका है, फिर भी प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें आज भी यातायात के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई हैं।

विशेष रूप से कुल्लू जिले के बंजार क्षेत्र में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। बंजार से गलवाहधार, चनौन, शर्ची, तांदी, ग्राहों, जौरी, विहार और श्रीकोट जैसे अनेक रूट आज भी सार्वजनिक परिवहन के लिए व्यवस्थित नहीं हो पाए हैं। इन मार्गों पर बस सेवाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही हैं, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

यातायात व्यवस्था के अभाव में ग्रामीणों को मजबूरन निजी और छोटी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। इससे आम जनता की आर्थिक स्थिति पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

यदि बंजार–डमोठी–भरठीधार सड़क की बात करें, जो एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक बाईपास मार्ग के रूप में विकसित की जानी थी, तो उसकी स्थिति और भी निराशाजनक है। यह सड़क अभी तक छोटी गाड़ियों के लिए भी पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है, जबकि यह मार्ग बंजार मुख्यालय के बिल्कुल समीप स्थित है।
यह बाईपास मार्ग बाजार क्षेत्र में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और भारी वाहनों को वैकल्पिक रास्ता प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। यदि यह समय पर तैयार हो जाता, तो बंजार बाजार की तंग सड़कों पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम किया जा सकता था। लेकिन धीमी कार्यप्रगति के कारण यह परियोजना अभी तक अधूरी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय के बावजूद कार्यों में अपेक्षित तेजी नहीं लाई गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आजकल मटर की फसल तैयार हो चुकी है जिसे सब्जी मंडी पहुंचने में सड़कों की खराब हालत के चलते बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत चुनाव के मध्य नजर भी इन सड़क मार्गों को जल्द बहाल करने की आवश्यकता है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रतीत होता है कि विभागीय स्तर पर कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन में कमी रही है। जनता अब सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द सड़कों को बहाल करने और परिवहन व्यवस्था को सुचारु करने की मांग कर रही है, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
चुनाव टालने के पीछे जो उद्देश्य था, वह जमीनी स्तर पर पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह मुद्दा आने वाले समय में जनाक्रोश का कारण बन सकता है।















