तेरी हंसी में जैसे सावन की फुहार,
बातों में छुपा मीठा सा प्यार,
माइक पे बोलती तू बड़े इत्मीनान से,
जैसे दिल जीत रही हो आराम-आराम से।
कहती है — “मौत मौका नहीं देती दोबारा”,
मैं हंसकर बोला — “ये तो है इशारा!”,
जो कहना है, अभी कह डालो,
वरना बाद में सिर्फ़ स्टेटस लगाते रह जाओ।
तू समझा रही थी ज़िंदगी का मतलब,
और मैं समझ रहा था तेरा हर इक लहजा अदब,
सच है — वक्त किसी का नहीं होता,
पर दिल है कि तुझ पे ही रुक-रुक कर सोता।
ये दुनिया भी क्या अजीब तमाशा है,
प्यार करना भी अब एक बड़ा तमगा है,
लोग ज्ञान सुनाते हैं बड़े शान से,
और दिल हार बैठते हैं मुस्कान से।
तो सुन ले ज़रा, ऐ ज़िंदगी की कहानी,
तेरे लफ्ज़ों में भी है थोड़ी सी नादानी,
मौत मिले ना मिले दोबारा, ये किसने जाना,
पर तेरी जैसी मुस्कान मिले — ये भी तो है बहाना।
चलो मान लिया, वक्त लौटकर नहीं आता,
पर इश्क़ है कि हर बार नया हो जाता,
मौत अगर आख़िरी सच है दुनिया का,
तो प्यार ही है — जो हर बार जीना सिखाता।


















