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बंजार मेले का आज होगा शुभारंभ, देव संस्कृति और व्यापार का अनूठा संगम बनेगा पांच दिवसीय आयोजन। भारी वाला है।


 


बंजार क्षेत्र के अधिष्ठाता देवता श्रृंगा ऋषि देवता के सम्मान में मनाया जाने वाला ऐतिहासिक बंजार मेला आज से आरंभ हो रहा है। धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारंपरिक व्यापार का प्रतीक यह मेला हर वर्ष की भांति इस बार भी पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया जा रहा है। पांच दिनों तक चलने वाला यह मेला 16 मई से 20 मई तक मनाया जाएगा।


परंपरा के अनुसार ज्येष्ठ संक्रांति की पूर्व संध्या पर देवता श्रृंगा ऋषि सकीर्ण देव यात्रा के तहत अपनी तपोस्थली के लिए प्रस्थान करते हैं तथा संक्रांति के दिन पुनः अपने मूल स्थान वागी देवालय लौटते हैं। इसके अगले दिन देवता अपने लाव-लश्कर, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और श्रद्धालुओं के विशाल कारवां के साथ बंजार उपमंडल मुख्यालय स्थित मेला ग्राउंड पहुंचते हैं। देवता के मेला मैदान में आगमन के साथ ही बंजार मेले का विधिवत शुभारंभ माना जाता है।


देवता श्रृंगा ऋषि के आगमन के बाद क्षेत्र के अन्य देवी-देवता भी मेला मैदान पहुंचकर मेले की धार्मिक गरिमा और शोभा को बढ़ाते हैं। देव परंपराओं और लोक आस्था से जुड़ा यह आयोजन बंजार क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र माना जाता है।


इस वर्ष मेले का औपचारिक उद्घाटन उपमंडल अधिकारी बंजार पंकज शर्मा द्वारा किया जाएगा। प्रशासन द्वारा मेले की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं तथा सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं।


बंजार मेला केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र का एक प्रमुख व्यापारिक मेला भी माना जाता है। मेले में रोजमर्रा की वस्तुओं के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों, जड़ी-बूटियों, गुच्छी, वनक्शा तथा अन्य पारंपरिक वन उत्पादों का व्यापक व्यापार होता है।

दूर-दराज क्षेत्रों से व्यापारी और लोग यहां पहुंचते हैं, जिससे मेले का आर्थिक महत्व भी काफी बढ़ जाता है।
मेले के दौरान दिन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें स्कूली बच्चों, महिला मंडलों, युवक मंडलों तथा विभिन्न लोक कलाकारों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी। ये कार्यक्रम बंजार के कला मंच एवं कला केंद्र में आयोजित होंगे, जहां स्थानीय संस्कृति और लोक कला की सुंदर छटा देखने को मिलेगी।


इसके अतिरिक्त प्रत्येक शाम सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन भी किया जाएगा, जिनमें प्रदेश और बाहरी क्षेत्रों के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। लोक नृत्य, लोक संगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि से पूरा बंजार क्षेत्र उत्सवमय वातावरण में सराबोर रहेगा।


धार्मिक आस्था, लोक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और व्यापारिक गतिविधियों का अनूठा संगम बंजार मेले को हिमाचल प्रदेश के प्रमुख मेलों में विशेष पहचान दिलाता है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी यह मेला आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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