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पुलवामा के अमर वीरों को सुंदरनगर में नमन: “शहीदों का बलिदान राष्ट्र की अमर धरोहर” – राकेश जमवाल

फ्रंट पेज न्यूज़ सुंदरनगर(विजय)।
14 फरवरी का दिन जैसे ही देश की स्मृतियों में दस्तक देता है, हर भारतीय की आंखें नम हो उठती हैं और हृदय गर्व से भर जाता है। पुलवामा के कायरतापूर्ण आतंकी हमले में शहीद हुए वीर जवानों की स्मृति में आज सामुदायिक भवन सुंदरनगर में पूर्व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (EX. CAPF) के तत्वावधान में एक भावभीना श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति, सम्मान और कृतज्ञता की भावना से ओतप्रोत रहा।
कार्यक्रम में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने विशेष रूप से उपस्थित होकर वर्ष 2019 में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले 40 वीर सपूतों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उपस्थित जनसमूह ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान वीरांगनाओं को सम्मानित कर उनके अदम्य साहस और धैर्य को नमन किया गया।
अपने संबोधन में राकेश जमवाल ने कहा कि पुलवामा के शहीदों का बलिदान केवल एक दर्दनाक घटना नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, साहस और कर्तव्यपरायणता की अमर गाथा है। हमारे सुरक्षा बलों के जवान कठिनतम परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा करते हुए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देने से पीछे नहीं हटते। उनका त्याग प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है।
उन्होंने कहा कि यह दिन हमें केवल शोक नहीं, बल्कि संकल्प का संदेश देता है—राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए सदैव सजग रहने का संकल्प। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सेना या सुरक्षा बलों की नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की साझा जिम्मेदारी है। हमें सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय मूल्यों और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए आगे बढ़ना होगा।
कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों, EX. CAPF के सदस्यों और गणमान्य नागरिकों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए शहीद परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की और कहा कि पूरा देश उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। युवाओं से विशेष आह्वान किया गया कि वे अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाएं।
श्रद्धांजलि सभा का हर क्षण इस सत्य को दोहराता रहा कि शहीद कभी मरते नहीं—वे राष्ट्र की आत्मा में बस जाते हैं। उनके बलिदान की ज्योति आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति का मार्ग दिखाती रहेगी।
राकेश जमवाल ने अंत में कहा कि शहीदों का सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है। देश सदैव इन वीर सपूतों का ऋणी रहेगा और उनकी स्मृति हमें निरंतर राष्ट्रसेवा के पथ पर अग्रसर करती रहेगी।

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