फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
अखिल भारतीय कोली समाज के प्रस्तावित विशाल राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर तैयारियां अब तेज़ होती दिखाई दे रही हैं और इसी क्रम में समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र कश्यप ने शिमला स्थित निवास पर हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा सैनिक कल्याण मंत्री कर्नल (डॉ.) धनी राम शांडिल से शिष्टाचार भेंट कर आयोजन को नई ऊर्जा दे दी। यह मुलाकात केवल औपचारिकता भर नहीं रही, बल्कि समाज की भावी दिशा, संगठनात्मक मजबूती और राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता के बड़े लक्ष्य को लेकर गंभीर और सार्थक चर्चा का मंच बनी। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश कोली समाज के प्रदेशाध्यक्ष अमर चंद शलाठ और अखिल भारतीय कोली समाज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सचिव उत्तम सिंह कश्यप की उपस्थिति ने बैठक को और अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बना दिया।
बैठक के दौरान 21 जून को आयोजित होने वाले अखिल भारतीय कोली समाज के प्रस्तावित राष्ट्रीय अधिवेशन की रूपरेखा, उद्देश्य और कार्यक्रमों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। वीरेंद्र कश्यप ने मंत्री को बताया कि यह अधिवेशन केवल एक औपचारिक सभा नहीं होगा, बल्कि देशभर के कोली समाज को एक मंच पर लाकर सामाजिक, शैक्षिक, राजनीतिक और आर्थिक सशक्तिकरण की ठोस रणनीति तैयार करने का प्रयास होगा। उन्होंने मंत्री को इस ऐतिहासिक आयोजन में विशेष अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया, जिसे मंत्री धनी राम शांडिल ने सहर्ष स्वीकार करते हुए समाज के प्रयासों की खुलकर सराहना की।
मंत्री शांडिल ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति उसकी एकता, शिक्षा और जागरूकता पर निर्भर करती है और इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के आयोजन सामाजिक चेतना को नई दिशा देते हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि समाज के उत्थान से जुड़े हर सकारात्मक प्रयास में सरकार का सहयोग रहेगा। उनकी इस सहमति को न केवल आयोजन के लिए नैतिक समर्थन माना जा रहा है, बल्कि इसे समाज और सरकार के बीच संवाद और विश्वास की मजबूत कड़ी के रूप में भी देखा जा रहा है।
प्रदेशाध्यक्ष अमर चंद शलाठ ने इस मुलाकात को आगामी राष्ट्रीय अधिवेशन की तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक बताया। उनका कहना है कि इससे न केवल आयोजन को गति मिलेगी, बल्कि समाज के लोगों में भी उत्साह का संचार होगा। कुल मिलाकर यह मुलाकात कोली समाज की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सक्रियता, संगठनात्मक शक्ति और सामाजिक पहचान को नए आयाम देने की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखी जा रही है।


























