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ईरान की सैन्य ताकत ‘खत्म’ नहीं, दावे बनाम हकीकत: ट्रंप के बयान पर उठे सवाल

फ्रंट पेज न्यूज डेस्क।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल जरूर मचाई है, लेकिन उनके दावों की सच्चाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान की नौसेना “डूब चुकी” है और वायुसेना “पूरी तरह खत्म” हो चुकी है। हालांकि, रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान वास्तविकता से काफी दूर और अतिशयोक्तिपूर्ण है।


ईरान आज भी मध्य पूर्व की एक मजबूत क्षेत्रीय शक्ति बना हुआ है। उसकी नौसेना भले ही अमेरिकी नौसेना जितनी आधुनिक न हो, लेकिन फारस की खाड़ी में उसकी रणनीतिक पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है।

असममित युद्ध (asymmetric warfare) की रणनीति, मिसाइल बोट्स और समुद्री माइंस के जरिए ईरान ने खुद को एक खतरनाक प्रतिद्वंद्वी के रूप में स्थापित किया है। ऐसे में “पूरी तरह खात्मा” जैसी बात सैन्य दृष्टिकोण से तार्किक नहीं लगती।


वायुसेना के मामले में भी स्थिति इतनी सरल नहीं है। ईरान के पास भले ही अत्याधुनिक पश्चिमी फाइटर जेट्स न हों, लेकिन उसने घरेलू स्तर पर ड्रोन तकनीक और मिसाइल सिस्टम में काफी प्रगति की है। हाल के वर्षों में ईरानी ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलें क्षेत्रीय संघर्षों में प्रभावी साबित हुई हैं। यह दर्शाता है कि उसकी वायु क्षमता खत्म नहीं हुई, बल्कि उसने अपना फोकस बदलकर आधुनिक युद्ध के नए तरीकों को अपनाया है।


ट्रंप का यह दावा कि ईरान की “नेतृत्व संरचना खत्म हो चुकी है” भी अतिरंजित प्रतीत होता है। ईरान की राजनीतिक और सैन्य प्रणाली बहु-स्तरीय (multi-layered) है, जहां एक व्यक्ति या समूह के हटने से पूरी व्यवस्था ध्वस्त नहीं होती। इतिहास गवाह है कि ईरान ने कई बार दबावों और प्रतिबंधों के बावजूद अपनी संस्थागत स्थिरता बनाए रखी है।


जहां तक NATO पर ट्रंप की आलोचना का सवाल है, यह उनका पुराना रुख रहा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि NATO अभी भी दुनिया का सबसे शक्तिशाली सैन्य गठबंधन है, जिसमें 30 से अधिक देश शामिल हैं और जिसकी सामूहिक रक्षा प्रणाली आज भी वैश्विक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। “कागजी शेर” कहना राजनीतिक बयानबाजी हो सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है।


कुल मिलाकर, ट्रंप के बयान को अधिकतर विशेषज्ञ राजनीतिक रणनीति और आक्रामक बयानबाजी के तौर पर देख रहे हैं, न कि तथ्यात्मक विश्लेषण के रूप में। ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो सकती है, लेकिन उसका “पूर्ण खात्मा” अभी भी एक दावा है—सच्चाई नहीं।

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