फ्रंट पेज न्यूज़,बंजार/कुल्लू।
प्रदेश में बढ़ती गर्मी और सूखे मौसम को देखते हुए वनाग्नि की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है। इसी कड़ी में द हंस फाउंडेशन और हिमाचल प्रदेश वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से लोगों को वनाग्नि से बचाव के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अभियान का उद्देश्य लोगों को जंगलों में आग लगने के कारणों, उससे होने वाले नुकसान और बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना है।

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जारी जागरूकता संदेश में आम जनता से अपील की गई है कि जंगलों में आग लगने से बचाने के लिए हमेशा सतर्क रहें तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें। लोगों को यह भी कहा गया है कि यदि कहीं आग लगने की घटना दिखाई दे तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाना अथवा वन विभाग को इसकी सूचना दें ताकि समय रहते आग पर काबू पाया जा सके।

अभियान के तहत घरों और जंगलों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, सूखी पत्तियों एवं कूड़े-कचरे को खुले में न जलाने की सलाह दी गई है। साथ ही जंगलों में धूम्रपान न करने, बीड़ी-सिगरेट या अन्य ज्वलनशील पदार्थ न फेंकने की भी अपील की गई है, क्योंकि छोटी सी चिंगारी भी बड़े वनाग्नि हादसे का कारण बन सकती है।

वन विभाग ने लोगों से जंगलों में कैंप फायर न करने और बिना अनुमति किसी भी प्रकार की ज्वलनशील वस्तु जंगल क्षेत्र में न ले जाने का आग्रह किया है। विभाग का कहना है कि आग लगने की स्थिति में फायर लाइन पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे जान-माल को खतरा हो सकता है।

इसके अलावा लोगों से सामुदायिक स्तर पर जागरूकता फैलाने और वनाग्नि रोकथाम कार्यों में वन विभाग का सहयोग करने की अपील की गई है। विभाग के अनुसार वनाग्नि केवल वन संपदा और वन्यजीवों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि पर्यावरण, जल स्रोतों और मानव जीवन पर भी गंभीर प्रभाव डालती है।
वन विभाग ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जंगलों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि या आग की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें।
वनाग्नि से संबंधित किसी भी आपात स्थिति में लोग हिमाचल प्रदेश वन अग्नि हेल्पलाइन नंबर 1070, 101, 107 तथा टोल फ्री नंबर 1800-180-1916 पर संपर्क कर सकते हैं।















