एसएमसी ने आपात बैठक कर शिक्षा विभाग से लगाई पद भरने की गुहार, 31 विद्यार्थियों के पलायन की आशंका
फ्रंट पेज न्यूज़ (छविंद्र शर्मा)आनी।
शिक्षा खंड आनी के अंतर्गत आने वाले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दलाश में लंबे समय से प्रधानाचार्य सहित आधा दर्जन महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़े होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। स्थिति को देखते हुए कई अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और उन्हें अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित करने पर विचार कर रहे हैं।

दलाश क्षेत्र के प्राध्यापक उमाशंकर दीक्षित ने बताया कि विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद लंबे समय से खाली है। इसके अलावा वाणिज्य संकाय में प्रवक्ता के दो पद, अर्थशास्त्र प्रवक्ता का एक पद तथा राजनीति शास्त्र के दो पद रिक्त हैं। इन पदों पर नियुक्तियां न होने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है और शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

शिक्षकों की कमी से उत्पन्न गंभीर स्थिति को देखते हुए विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) की एक आपात बैठक वीरवार को आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विद्यालय के कार्यकारी प्रधानाचार्य अजय ठाकुर ने की, जबकि एसएमसी प्रधान सुनील कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर शिक्षा विभाग से रिक्त पदों को शीघ्र भरने की मांग की गई।

बैठक में बताया गया कि विद्यालय के वाणिज्य संकाय में जमा एक कक्षा में 20 तथा जमा दो में 11 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। संबंधित विषयों के प्रवक्ता उपलब्ध न होने के कारण इन विद्यार्थियों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है।
एसएमसी प्रधान सुनील कुमार ने कहा कि शिक्षकों की कमी के चलते अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि वाणिज्य संकाय में रिक्त पदों को समय रहते नहीं भरा गया तो 31 विद्यार्थी दूसरे विद्यालयों में माइग्रेट करने को मजबूर हो सकते हैं। इससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था और छात्र संख्या दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की कि विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए दलाश स्कूल में सभी आवश्यक रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति के तहत अब गैर-बोर्ड कक्षाओं की वार्षिक परीक्षाएं दिसंबर माह में आयोजित की जानी हैं। ऐसे में विद्यालयों में समय पर पाठ्यक्रम पूरा करवाने और पठन-पाठन को सुचारू बनाए रखने के लिए पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक मानी जा रही है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों को उम्मीद है कि शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या का शीघ्र समाधान करेगा।











