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राजनीति सेवा का माध्यम है, सत्ता का नहीं — राकेश जमवाल

फ्रंट पेज न्यूज़ सुंदरनगर(विजय)।


समर्पण दिवस पर सुंदरनगर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय को श्रद्धांजलि, अंत्योदय के संकल्प को दोहराया


भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा होना चाहिए। यह विचार उन्होंने पार्टी कार्यालय सुंदरनगर में आयोजित “समर्पण दिवस” कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए, जहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम जिलाध्यक्ष हीरा लाल की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर पार्टी के पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, मोर्चा पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
एकात्म मानववाद की प्रासंगिकता पर जोर
राकेश जमवाल ने अपने संबोधन में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उन्होंने “एकात्म मानववाद” की अवधारणा प्रस्तुत कर भारतीय राजनीति को नई दिशा दी। यह विचारधारा मनुष्य को केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वित रूप में देखती है।
उन्होंने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी इसी वैचारिक आधार पर आगे बढ़ रही है और शासन की नीतियां भी इसी सोच से प्रेरित हैं।
अंत्योदय: अंतिम व्यक्ति तक विकास
जमवाल ने कहा कि “अंत्योदय”—समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उत्थान—दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन का मूल था। राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तब मानी जाएगी जब गरीब, किसान, श्रमिक, महिलाएं और वंचित वर्ग सशक्त होंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित योजनाएं अंत्योदय की भावना को धरातल पर उतार रही हैं।
इन योजनाओं में —
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
प्रधानमंत्री आवास योजना
उज्ज्वला योजना
आयुष्मान भारत योजना
किसान सम्मान निधि
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT)
का विशेष रूप से जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि आज गरीब केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सक्रिय सहभागी बन चुका है।
कार्यकर्ताओं को सेवा का संदेश
राकेश जमवाल ने कहा कि “समर्पण दिवस” केवल श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और नए संकल्प का अवसर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं और सेवा, सादगी तथा संगठन को मजबूत करें।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ कार्य करने और अंत्योदय के संकल्प को धरातल पर उतारने का संकल्प लिया।
जमवाल ने अपने वक्तव्य का समापन करते हुए कहा,
“जब अंतिम व्यक्ति सशक्त होगा, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा। यही पंडित दीनदयाल उपाध्याय को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

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