फ्रंट पेज न्यूज़ (छविंद्र शर्मा)निरमंड।
हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित साहित्यकार, शिक्षाविद एवं वरिष्ठ पत्रकार रवि शर्मा की प्रथम काव्य संग्रह पुस्तक “मेरी कलम के बोल” शीघ्र ही पाठकों के हाथों में होगी।

पुस्तक का प्रकाशन कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही यह साहित्य प्रेमियों के लिए उपलब्ध करवा दी जाएगी। पुस्तक के प्रकाशन को लेकर साहित्यिक जगत में उत्साह का माहौल है।

रवि शर्मा ने बताया कि उनकी इस काव्य संग्रह पुस्तक में समाज, राष्ट्र और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े अनेक विषयों को स्थान दिया गया है। संग्रह में देशभक्ति, राष्ट्रसेवा, सैनिकों के त्याग एवं बलिदान, पारिवारिक रिश्तों की गरिमा, विद्यार्थियों के जीवन में परीक्षा का महत्व, मतदाता जागरूकता, राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का सम्मान, सामाजिक जिम्मेदारियां तथा व्यक्ति के जीवन में उसके किरदार जैसे विविध विषयों पर आधारित रचनाएं शामिल की गई हैं।

इन कविताओं के माध्यम से उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों और जीवन के अनेक पहलुओं को अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया है।
उन्होंने बताया कि पुस्तक में संकलित अधिकांश रचनाएं उनके जीवन अनुभवों, सामाजिक अवलोकनों और मानवीय मूल्यों पर आधारित हैं। उनका मानना है कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और कविताओं के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच तथा जागरूकता का संदेश प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह काव्य संग्रह पाठकों, साहित्यकारों और युवा रचनाकारों को विशेष रूप से पसंद आएगा।
करीब 55 चयनित कविताओं से सुसज्जित इस काव्य संग्रह को राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन, कोलकाता द्वारा आईएसबीएन (ISBN) नंबर भी प्रदान किया गया है। यह पुस्तक की साहित्यिक पहचान और प्रकाशन की गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। पुस्तक का मुखपृष्ठ भी आकर्षक ढंग से तैयार किया गया है, जो पाठकों को पहली नजर में ही आकर्षित करने की क्षमता रखता है।

इस पुस्तक की एक और विशेषता यह है कि रवि शर्मा ने इसे अपने पूज्य पिता स्वर्गीय मूल राज शर्मा की स्मृति को समर्पित किया है। स्वर्गीय मूल राज शर्मा स्वयं भी उच्च कोटि के लेखक एवं साहित्य प्रेमी थे। रवि शर्मा का कहना है कि उन्हें साहित्य और लेखन की प्रेरणा अपने पिता से ही मिली और यह पुस्तक उनके प्रति श्रद्धा एवं सम्मान का प्रतीक है।
रवि शर्मा वर्तमान में शिक्षा विभाग में प्रवक्ता के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षण कार्य के साथ-साथ साहित्य सृजन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। शिक्षा विभाग में आने से पूर्व उन्होंने लगभग 25 वर्षों तक प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पत्रकारिता की है।

पत्रकारिता के दौरान उन्होंने सामाजिक, सांस्कृतिक और जनसरोकारों से जुड़े अनेक विषयों को प्रमुखता से उठाया। साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें विभिन्न संस्थाओं एवं मंचों द्वारा समय-समय पर सम्मानित भी किया जा चुका है।

साहित्य प्रेमियों का मानना है कि “मेरी कलम के बोल” केवल एक काव्य संग्रह नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज साबित होगी। पुस्तक के प्रकाशन से क्षेत्र के साहित्यिक वातावरण को नई दिशा और ऊर्जा मिलने की उम्मीद की जा रही है।
फोटो कैप्शन:
साहित्यकार रवि शर्मा की शीघ्र प्रकाशित होने वाली प्रथम काव्य संग्रह पुस्तक “मेरी कलम के बोल” का मुखपृष्ठ।












