विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत का बड़ा फैसला, नाबालिग से यौन उत्पीड़न और धमकी देने के मामले में सुनाई सख्त सजा।
नाबालिग से यौन उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने आरोपी ठाकुर दास को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 65 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि आरोपी जुर्माने की राशि अदा करने में असफल रहता है तो उसे दो वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
जिला न्यायवादी ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 और 8 के तहत दोषी पाया है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर यह फैसला सुनाया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला वर्ष 2020 का है। 2 अक्टूबर 2020 को पीड़िता की माता ने पुलिस थाना कुल्लू में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनकी नाबालिग बेटी ने आरोपी द्वारा दो अलग-अलग अवसरों पर यौन उत्पीड़न किए जाने की जानकारी दी थी।

बच्ची ने यह भी बताया था कि आरोपी ने घटना का खुलासा करने पर उसके माता-पिता की हत्या करने की धमकी दी थी।
शिकायत में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी कई बार बच्ची के साथ अनुचित स्पर्श और अश्लील हरकतें कर चुका था। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस थाना कुल्लू में एफआईआर संख्या 290/2020 दर्ज की गई और मामले की गहन जांच की गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल आठ गवाहों के बयान दर्ज करवाए, जिनके आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी ठाकुर दास को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में नाबालिग बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को समाज के लिए गंभीर खतरा बताते हुए ऐसे मामलों में कठोर दंड की आवश्यकता पर बल दिया।

इस फैसले को बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा कि कानून ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगा।











