फ्रंट पेज न्यूज़, बंजार।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का असर अब स्थानीय बाजारों तक साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने का सीधा असर भारत में एलपीजी गैस की उपलब्धता पर पड़ रहा है, जिसका सबसे अधिक खामियाजा आम उपभोक्ताओं, होटल-ढाबा संचालकों और छोटे कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है।
घरेलू गैस की भारी किल्लत
बंजार क्षेत्र में घरेलू गैस सिलेंडरों की उपलब्धता अनियमित हो गई है। उपभोक्ताओं को गैस प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोग पूरे दिन निर्धारित स्थानों पर इंतजार करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। इससे समय और धन दोनों की हानि हो रही है।

कमर्शियल गैस आपूर्ति भी बाधित
कमर्शियल सिलेंडरों की भारी कमी ने होटल और ढाबा व्यवसाय को गंभीर संकट में डाल दिया है। कई प्रतिष्ठान बंद हो चुके हैं, जबकि कुछ बंद होने की कगार पर हैं। जिन व्यापारियों को किसी तरह गैस मिल भी रही है, उन्हें अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है, जिसका बोझ अंततः ग्राहकों पर पड़ रहा है।
आपूर्ति में आई भारी गिरावट
बंजार स्थित भारत गैस एजेंसी के अनुसार, पहले हर महीने लगभग 12,960 (9000 घरेलू सिलेंडर 3600 कमर्शियल)(36 लोड) सप्लाई आती थी। लेकिन 25 मार्च के बाद अब तक लगभग 9,000 से अधिक सिलेंडरों की सप्लाई कम आ रही है। इस कारण उपभोक्ताओं को बुकिंग के 45 दिन बाद ही गैस उपलब्ध कराई जा रही है।

व्यापार मंडल बंजार के प्रधान प्रमेश शर्मा ने सरकार से मांग की है कि होटल और ढाबा संचालकों के लिए गैस या वैकल्पिक ईंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि इस संकट के कारण सैकड़ों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है और तत्काल राहत उपाय जरूरी हैं।
महंगाई और उपभोक्ताओं पर असर
गैस की कमी का असर बाजार में भी दिख रहा है। खाद्य पदार्थों और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि हो रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
प्रशासन से जानना चाहा तो जिला खाद्य पूर्ति नियंत्रक, ( DFC ) शिव राम ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों में गैस की आपूर्ति सीमित है, इसलिए बुकिंग के 45 दिन बाद ही वितरण संभव हो पा रहा है। विभाग स्थिति को सामान्य करने के प्रयास कर रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि होटल, ढाबा संचालक और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ता यदि लिखित मांग प्रस्तुत करें, तो उन्हें वैकल्पिक ईंधन के रूप में मिट्टी तेल (केरोसीन) उपलब्ध कराया जा सकता है।गैस आपूर्ति में आई यह बाधा केवल एक अस्थायी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था और आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव और गहरा हो सकता है।
गैस आपूर्ति में आई यह बाधा केवल एक अस्थायी समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। यदि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था और आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव और गहरा हो सकता है।

















