फ्रंट पेज न्यूज़, बंजार।
बंजार क्षेत्र की तांदी पंचायत के तांदी गांव में उस समय धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का अनुपम दृश्य देखने को मिला, जब देवता ऋषि मार्कंडेय बला तथा जल देवता भूमार विशेष आमंत्रण पर अपने सैकड़ों देऊलुओं (हरियानों) के साथ भव्य लाव-लश्कर सहित यहां पहुंचे। इस अवसर पर गढ़पति देवता शेषनाग जिभी, पांच वीर देवता धारा लुसाल, लाटोडा देवता भलाग्रा सहित अन्य स्थानीय देवी-देवताओं के साथ उनका भावपूर्ण मिलन हुआ।

देव मिलन के इस पावन अवसर पर पूरा वातावरण श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। जब विभिन्न देवताओं के रथ आमने-सामने आए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका मिलन हुआ, तो उपस्थित जनसमूह इस दिव्य दृश्य को देखकर भाव-विभोर हो उठा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, देव परंपराओं की झलक और श्रद्धालुओं की आस्था ने माहौल को पूरी तरह देवमय बना दिया।
इस अनूठी परंपरा को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस प्रकार के देव मिलन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत बनाए रखते हैं।
हिमाचल प्रदेश को यूं ही ‘देवभूमि’ नहीं कहा जाता। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में देवी-देवताओं की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जहां देवता अपने अनुयायियों के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाकर मिलन करते हैं। यह परंपरा सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान और लोक आस्था का अद्वितीय संगम प्रस्तुत करती है।
तांदी में आयोजित यह देव मिलन भी इसी विरासत का सजीव उदाहरण रहा, जिसने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि हिमाचल की संस्कृति में देव परंपराएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक और जीवंत हैं, जितनी सदियों पहले थीं।













