ढाई फेरे की रस्म संग रातभर गूंजे भजन और नाटी
आनी (कुल्लू)। जिला कुल्लू के आनी क्षेत्र में उस समय भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब भगवान मुरलीमनोहर सुसज्जित पालकी में विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दिव्य दर्शन देने निकले। शंखनाद और मंदिर की घंटियों की पावन ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो गया।

फूलों से सजी आकर्षक पालकी और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर गूंज के बीच श्रद्धालु मार्ग के दोनों ओर हाथ जोड़कर खड़े रहे। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के चेहरों पर आस्था, श्रद्धा और अपार आनंद की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही थी। प्रभु के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने स्वयं को धन्य अनुभव किया।
इस पावन अवसर पर “ढाई फेरे” की पारंपरिक रस्म विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न हुई। यह रस्म भक्त और भगवान के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है। जैसे ही प्रभु ने ढाई फेरे पूर्ण किए, श्रद्धालु जयकारों से वातावरण को गुंजायमान कर उठे।
रात्रि भर क्षेत्र में भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का अनूठा दृश्य देखने को मिला। श्रद्धालु पारंपरिक नाटी में थिरकते रहे और भजनों में लीन होकर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करते रहे। ढोल-नगाड़ों की थाप और भजनों की मधुर ध्वनि ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
रस्मों के समापन के पश्चात भगवान मुरलीमनोहर अपनी पालकी में पुनः मंदिर पधारे। यह पावन आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक श्रद्धा का जीवंत उत्सव भी सिद्ध हुआ।


























