फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
रेवेन्यू डैफिसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद होने के बाद उपजे वित्तीय संकट के बीच हिमाचल प्रदेश पेंशनभोगी संघ ने सरकार और वित्त विभाग को स्पष्ट संदेश दिया है—कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन, महंगाई भत्ता (डीए) और अन्य वित्तीय अधिकारों पर कोई भी चोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संघ ने सचिवालय में प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार द्वारा मंत्रिमंडल, कांग्रेस विधायकों और मीडिया के समक्ष दी गई प्रस्तुति में सुझाए गए प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

संघ के अनुसार प्रस्तुति में संशोधित वेतनमान रोकने, महंगाई भत्ता (डीए) फ्रीज करने, डीए एरियर का भुगतान न करने तथा ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) पर पुनर्विचार कर एनपीएस/यूपीएस लागू करने जैसे सुझाव दिए गए, जो न केवल कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों के खिलाफ हैं बल्कि राजनीतिक और नैतिक दृष्टि से भी अनुचित हैं।
प्रदेशाध्यक्ष एल०आर० गुलशन, प्रदेश उपाध्यक्ष खुशहाल चंद नेगी, एसपी सागर, महिला विंग की प्रदेश उपाध्यक्ष चिंतपूर्णा और जिला कुल्लू पेंशनभोगी संघ के अध्यक्ष दयाल सिंह ठाकुर सहित अन्य नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि ओपीएस की बहाली वर्तमान सरकार की चुनावी गारंटी थी और उसी आधार पर सरकार सत्ता में आई। ऐसे में ओपीएस पर पुनर्विचार का सुझाव कर्मचारियों के विश्वास के साथ विश्वासघात है।
एल०आर० गुलशन ने तीखा सवाल उठाया कि वित्त विभाग ने कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन-भत्तों को फ्रीज करने का प्रस्ताव तो दे दिया, लेकिन मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ अफसरों तथा बोर्ड-निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को मिलने वाली सुविधाओं और भारी-भरकम खर्चों में कटौती का कोई उल्लेख क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि यदि व्यवस्था परिवर्तन की बात की जा रही है तो शुरुआत शीर्ष स्तर के खर्चों से होनी चाहिए, न कि उन कर्मचारियों और पेंशनरों से जिन्होंने दशकों तक सेवा दी है।
संघ ने यह भी चेतावनी दी कि यदि बिजली-पानी पर दी जा रही सब्सिडी समाप्त की गई, सहारा और हिम केयर जैसी स्वास्थ्य योजनाओं पर रोक लगाई गई, दो वर्षों से रिक्त पदों को खत्म किया गया या शिक्षण संस्थानों के विलय के नाम पर 30 प्रतिशत स्टाफ घटाया गया, तो इसका व्यापक सामाजिक और आर्थिक असर होगा। संघ के अनुसार इन प्रस्तावों से प्रदेश के लगभग पौने चार लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ-साथ करीब 75 लाख की आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित होगी।
पेंशनभोगी संघ ने सरकार से मांग की है कि वयोवृद्ध पेंशनरों और कर्मचारियों की जायज़ देनदारियों को फ्रीज करने के बजाय प्रशासनिक और राजनीतिक अपव्यय पर अंकुश लगाया जाए। एल०आर० गुलशन ने दो टूक शब्दों में चेताया कि यदि कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों पर आंच आई तो संघ प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा।































