हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश-विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक राजनीति स्वास्थ्य मेले और त्यौहार

राजकीय महाविद्यालय आनी में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर गूंजे लोक–संस्कृति के स्वर, विद्यार्थियों ने पहाड़ी बोली से बांधा समां

Follow Us:

फ्रंट पेज न्यूज़ आनी (राजशर्मा)।
राजकीय महाविद्यालय आनी में अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर मातृभाषा परिषद द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम भाषाई विविधता, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक अस्मिता का जीवंत उत्सव बन गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करना ही नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए बहुभाषावाद और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी रहा।


कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दायक राम ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि लोक संस्कृति के संरक्षण में विशेष योगदान देने वाले हुक्म चंद विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। मातृभाषा परिषद के अध्यक्ष प्रो. निर्मल सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि स्थानीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक स्मृति और सांस्कृतिक पहचान की धरोहर हैं, जिन्हें संरक्षित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे सभागार को लोक रंग में रंग दिया। छात्राओं यश्वरी, रनिका, सुनिधि चौहान, रिया शर्मा और रुचिता ने पहाड़ी बोली में भावपूर्ण कविता पाठ कर स्थानीय भाषा की मिठास, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की गहराई को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं विवेक, गौरव और प्रिया ने ‘जत्ती’ गायन के माध्यम से शिवरात्रि पर्व की सांस्कृतिक और पौराणिक परंपराओं को जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया जब रिया शर्मा, डिंपल शर्मा, निधि शर्मा और आरती शर्मा ने बाह्य सराज क्षेत्र के पारंपरिक विवाह संस्कार गीत प्रस्तुत किए। इन लोकधुनों ने उपस्थित जनसमूह को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए वातावरण को भाव-विभोर कर दिया।
विशिष्ट अतिथि हुक्म चंद ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जो समाज अपनी मातृभाषा से दूर हो जाता है, वह अपनी पहचान खो देता है। उन्होंने युवाओं से लोक परंपराओं को अपनाने और उन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. दायक राम ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस हमें भाषाई विविधता के संरक्षण का संदेश देता है और यह दिन हमें अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर प्रो. नरेंद्र पॉल, अधीक्षक गोपाल शर्मा, डॉ. संगीता नेगी, प्रो. पंपी घामटा सहित मातृभाषा परिषद के सभी सदस्य, प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में छात्र–छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन मातृभाषा और लोक संस्कृति के संरक्षण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर (X) पर शेयर करने के लिए निम्नलिखित बटन पर क्लिक करें।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page