हिमाचल प्रदेश स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश-विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक राजनीति स्वास्थ्य मेले और त्यौहार

होली 2026: मुहूर्त, सूतक और अवकाश—परंपरा का संतुलित अर्थ

On: February 27, 2026 7:32 PM
Follow Us:
विज्ञापन

फ्रंट पेज न्यूज डेस्क।
फाल्गुन पूर्णिमा का पर्व होली, चंद्र गणना पर आधारित है। वर्ष 2026 में पंचांगों के अनुसार स्थिति संक्षेप में इस प्रकार है (स्थानीय पंचांग में मिनटों का अंतर संभव):
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 3 मार्च 2026 (दोपहर बाद/सायं)
भद्रा का प्रभाव: 3 मार्च की संध्या तक/आंशिक रूप से रात्रि में (स्थानानुसार भिन्न)
होलिका दहन: 3 मार्च 2026 की रात्रि, भद्रा समाप्ति के बाद शुभ मुहूर्त में
रंगों की होली (धुलेंडी): 4 मार्च 2026
सरकारी अवकाश: 4 मार्च 2026 (रंगोत्सव के दिन)


नियम: होलिका दहन भद्रा रहित काल में ही किया जाता है। रंगों की होली पूर्णिमा के अगले दिन (कृष्ण प्रतिपदा) मनाई जाती है—इसलिए 4 मार्च को सार्वजनिक उत्सव और अवकाश स्वाभाविक हैं।
3 मार्च की शाम से “सूतक” की चर्चा क्यों?
“सूतक” शब्द शास्त्रों में मुख्यतः ग्रहण के संदर्भ में प्रयुक्त होता है। होली के प्रसंग में 3 मार्च की संध्या से पूर्णिमा लगने और भद्रा के कारण कुछ स्थानों पर मांगलिक कार्यों को टालने की परंपरा है, जिसे लोकभाषा में लोग “सूतक जैसा काल” कह देते हैं।
यह ग्रहण-सूतक नहीं, बल्कि भद्रा-निषेध और पूर्णिमा-आरंभ से जुड़ी सावधानी है। इसलिए भ्रम की आवश्यकता नहीं—होलिका दहन 3 मार्च की रात, भद्रा समाप्ति के बाद; और रंगोत्सव 4 मार्च को ही मान्य है।
परंपरा और प्रशासन—दोनों का तर्क
धार्मिक आधार: चंद्र तिथि और भद्रा-विचार।
प्रशासनिक आधार: रंगों का सार्वजनिक उत्सव अगले दिन होता है; इसलिए अवकाश 4 मार्च को।
इस प्रकार 3 मार्च की रात्रि दहन और 4 मार्च का अवकाश—दोनों अपने-अपने संदर्भ में उचित हैं।
एक छोटी कविता: “फाल्गुन का निर्णय”
फाल्गुन की चाँदनी बोले,
“मुहूर्त की रेखा देखो भली,”
भद्रा हटे तो अग्नि जले,
रात सजे होलिका की गली।
साँझ से सावन-सा संयम रखो,
आस्था का अर्थ समझो सरल,
कल प्रतिपदा रंग बिखेरेगी,
हँसेगा घर-आँगन निर्भय, निर्मल।
दहन में अहंकार जले,
रंगों में मेल-मिलाप खिले—
तिथि और तर्क संग-संग चलें,
यही होली का सच्चा फल मिले।
निष्कर्ष
3 मार्च 2026 (रात्रि): भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन।
4 मार्च 2026: रंगों की होली और सरकारी अवकाश।
“सूतक” को लेकर भ्रम न रखें—यह भद्रा/तिथि-आरंभ की पारंपरिक सावधानी है, ग्रहण-सूतक नहीं।
आस्था के साथ विवेक जोड़ें—यही होली का उजला संदेश है।
आपके परिवार को सुरक्षित, मंगलमय और रंगों से भरी होली की शुभकामनाएँ।

व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर (X) पर शेयर करने के लिए निम्नलिखित बटन पर क्लिक करें।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page