फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
हिमाचल प्रदेश पेंशनभोगी संघ ने पेंशनर्स की “संयुक्त संघर्ष समिति” द्वारा आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की प्रत्येक सीट पर प्रत्याशी उतारने के ऐलान का जोरदार स्वागत किया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष एल.आर. गुलशन सहित प्रदेश और जिला स्तर के अनेक पदाधिकारियों ने इसे पेंशनरों और कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई में एक निर्णायक कदम बताया है।

संघ के प्रदेशाध्यक्ष एल.आर. गुलशन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार, महासचिव मिलाप चंद, प्रदेश उपाध्यक्ष खुशहाल चंद नेगी, एस.पी. सागर, प्रदेश उपाध्यक्ष (महिला विंग) लीला डोगरा, संगठन सचिव मनोरमा डोगरा, जिला किन्नौर के अध्यक्ष प्रताप नेगी, जिला कुल्लू के अध्यक्ष दयाल सिंह ठाकुर, जिला मंडी के अध्यक्ष शारदा नंद शर्मा सहित कई अन्य पेंशनर नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि प्रदेश में करीब साढ़े चार लाख कर्मचारी और पेंशनर तथा लगभग 40 लाख मतदाता हैं। यदि ये सभी वर्ग एकजुट होकर संयुक्त संघर्ष समिति के प्रत्याशियों का समर्थन करते हैं तो “धमाकेदार जीत” सुनिश्चित की जा सकती है।
सरकारों पर अनदेखी का आरोप
संघ ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सत्तारूढ़ रही सरकारों ने लगातार पेंशनरों और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की है। प्रदेशाध्यक्ष एल.आर. गुलशन ने कहा कि हर बार आर्थिक बदहाली का हवाला देकर जायज मांगों को टाल दिया गया।
उन्होंने उल्लेख किया कि मार्च 2022 में तत्कालीन जयराम ठाकुर सरकार ने जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान के एरियर में मात्र 50 हजार रुपये जारी कर मामला समाप्त करने का प्रयास किया। वहीं दिसंबर 2022 में सत्ता में आई सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर भी उन्होंने तीन वर्षों से लंबित वित्तीय देनदारियों का भुगतान न करने का आरोप लगाया। संघ का कहना है कि करोड़ों रुपये की देनदारियां अब तक अटकी हुई हैं।
‘चुनौती स्वीकार करने का समय’
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पिछली विधानसभा में कर्मचारियों और पेंशनरों को अपने हक के लिए चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। अब संयुक्त संघर्ष समिति ने उस चुनौती को स्वीकार करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की “रीढ़” माने जाने वाले कर्मचारी और पेंशनर अपनी समस्याओं को भली-भांति समझते हैं, इसलिए उनके चुने हुए नुमाइंदे ही विधानसभा में इन मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकते हैं।

झूठी गारंटियों की बजाय कार्यकुशलता का वादा
संघ ने स्पष्ट किया कि संयुक्त संघर्ष समिति के संभावित प्रत्याशी राजनीतिक दलों की तरह “झूठी गारंटियाँ” देने के बजाय कार्यकुशलता, रोजगारोन्मुखी नीतियों, स्वच्छ एवं पारदर्शी प्रशासन तथा भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था देने के वादे के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे।
संघ का दावा है कि कर्मचारियों, पेंशनरों और आम जनता के व्यापक समर्थन से उनके प्रत्याशी निश्चित रूप से विधानसभा की दहलीज पार करेंगे और प्रदेश में एक नई राजनीतिक दिशा स्थापित करेंगे।





























