फ्रंटपेज न्यूज़ रामपुर बुशहर(राज शर्मा)।
एकल अभियान अंचल रामपुर बुशहर द्वारा रामपुर चाटी में आयोजित अंचल स्तरीय सत्संग मंडली प्रतियोगिता श्रद्धा, अनुशासन और सांस्कृतिक उत्साह के वातावरण में संपन्न हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कार पक्ष तथा मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिससे पूरे आयोजन में आध्यात्मिक गरिमा का भाव व्याप्त हो गया।

प्रतियोगिता में विभिन्न संचों की सत्संग मंडलियों ने भक्ति गीतों, लोकधुनों और सामूहिक प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की। संच अरसू से माटी सिम सत्संग मंडली टिकरी ने अपनी प्रभावशाली और

समन्वित प्रस्तुति के बल पर प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि संच तकलेच के अंतर्गत श्राई कोटी सत्संग मंडली पटेना द्वितीय स्थान पर रही। प्रतियोगिता में कुल 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 70 महिलाएं और 30 पुरुष शामिल रहे। महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष ऊर्जा और गरिमा प्रदान की।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला रामपुर के संघ चालक अनिल वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा के माध्यम से समाज में सकारात्मक और मूल्याधारित परिवर्तन लाने का आह्वान किया।

अंचल रामपुर समिति के उपाध्यक्ष दीपक शर्मा ने कहा कि लोक संस्कृति का संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, क्योंकि हमारी परंपराएं ही समाज की आत्मा और पहचान हैं। प्रभाग महिला प्रभारी दिशा सुमी ने महिला सशक्तिकरण को सामाजिक प्रगति का आधार बताते हुए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और इसे प्रेरणादायक बताया।
अंचल अभियान प्रमुख रामपुर प्रमोद देष्टा ने एकल अभियान की विभिन्न गतिविधियों और पंचमुखी शिक्षा प्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, संस्कार, स्वावलंबन और सामाजिक जागरूकता के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में भाग प्रशिक्षण प्रमुख सीमा मांटा, गतिविधि प्रमुख लता ठाकुर, संच प्रशिक्षक एकता, इंदिरा, जियामणि, पार्वती एवं कमलेश व कला, संच साधक रेजा ठाकुर, कल्पना, राजकुमारी, निर्मला, पम्मी वर्मा तथा ग्रामोत्थान से सविता और जितेंद्र सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
अंत में मुख्य अतिथि ने विजेता टीमों को पुरस्कार वितरित कर उनके प्रयासों की सराहना की। आयोजन का समापन उत्साह, सामूहिकता और सांस्कृतिक गरिमा के वातावरण में हुआ, जिसने यह संदेश दिया कि भक्ति और लोकसंस्कृति समाज को जोड़ने की सबसे सशक्त कड़ी हैं।




























