फ्रंट पेज न्यूज़ मुख्य संपादक प्रमेश शर्मा की कलम से।
हिमाचल प्रदेश अपने प्राकृतिक संसाधनों और बर्फीले पहाड़ों के कारण एडवेंचर टूरिज्म के लिए आदर्श माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद यहां सरकारी स्तर पर ठोस नीति और सक्रियता का अभाव साफ नजर आता है।
मार्च 2024 में जलोड़ी दर्रा में आयोजित स्की माउंटेनियरिंग की पहली ओपन नेशनल चैंपियनशिप स्थानीय संगठनों और अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण संस्थान (AVBIMAS) के सहयोग से संभव हुई।
यह आयोजन स्थानीय प्रयासों की सफलता का उदाहरण था, लेकिन यह भी दिखाता है कि सरकारी नीति अभी पीछे है। जबकि कुल्लू सिराज और मंडी सिराज के ऐसे कई क्षेत्र है जहां पर एडवेंचर टूरिज्म आज तक बढ़ावा दिया होता तो शायद योग क्षेत्र भी विश्व के दुश्मन चित्र पर दिखता जहां एडवेंचर टूरिज्म अपनी सुर्ख़ियों में रहता है लेकिन क्षेत्र का दुर्भाग्य यह है किस इसे तवज्जो नहीं दी गई अब जबकि योग क्षेत्र जीबी वाली टूरिज्म तीर्थन वैली टूरिज्म के मध्य नजर विकसित होकर एक बड़े मानचित्र पर उभर कर सामने आया है लेकिन अभी भी इस दिशा में संतोषजनक प्रगति नहीं देखने को मिल रही है इस क्षेत्र में अभी तक पर्यटन विभाग हिमाचल प्रदेश साहसिक गतिविधियों (एडवेंचर) को सरकारी एजेंसीज की ओर से कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया,यह तो एक इतफ़ाक़ है कि इस क्षेत्र अपनी योग्यता और करणी के आधार पर यह स्थान बनाया।
इसके विपरीत अरुणाचल प्रदेश सरकार स्कीमो फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को इस क्षेत्र से जोड़ रही है।
दुनिया में जहां एडवेंचर टूरिज्म फल-फूल रहा है
स्विट्ज़रलैंड एडवेंचर टूरिज्म का वैश्विक मॉडल माना जाता है। यहां स्कीइंग, पैराग्लाइडिंग, माउंटेनियरिंग जैसी गतिविधियों के लिए विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा मानक और ट्रेनिंग सिस्टम मौजूद हैं।
न्यूज़ीलैंड को “एडवेंचर कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड” कहा जाता है। बंजी जंपिंग, स्काईडाइविंग और रिवर राफ्टिंग यहां की पहचान बन चुके हैं, जो सरकार और निजी क्षेत्र की साझेदारी से विकसित हुए हैं।
कनाडा में एडवेंचर टूरिज्म को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया है। यहां नेशनल पार्क्स, ट्रेल्स और गाइडेड टूर के जरिए रोजगार के बड़े अवसर बनाए गए हैं।
भारत के वे राज्य जहां एडवेंचर टूरिज्म मजबूत है।
जम्मू और कश्मीर
गुलमर्ग जैसे क्षेत्र स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
उत्तराखंड
ऋषिकेश की रिवर राफ्टिंग और औली की स्कीइंग ने राज्य को एडवेंचर हब बना दिया है।
सिक्किम
ट्रेकिंग, माउंटेन बाइकिंग और हाई-एल्टीट्यूड एडवेंचर के लिए तेजी से उभरता केंद्र।
गोवा
वॉटर स्पोर्ट्स और बीच एडवेंचर गतिविधियों के लिए देशभर में लोकप्रिय।
हिमाचल में संभावनाएं तो बहुत है परंतु उनके दोहन, संवर्धन, उत्प्रेरक संघकटों की क्रियाशीलता एवं सरकार की इच्छा शक्ति से ही ऐसा कुछ संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में भी कुल्लू, सराज और मंडी जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन्हें विकसित करने के लिए स्पष्ट एडवेंचर टूरिज्म नीति,
इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा मानकों में निवेश
स्थानीय युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम
निजी और सरकारी साझेदारी
की सख्त जरूरत है।
यदि सरकार वैश्विक और राष्ट्रीय उदाहरणों से सीख लेकर ठोस कदम उठाती है, तो हिमाचल न केवल देश बल्कि विश्व स्तर पर एडवेंचर टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बन सकता है।














