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बैसाखी संक्रांति आज: आस्था, उल्लास और समृद्धि का पर्व पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया जा रहा है।


कुल्लू/शिमला,


बैसाखी संक्रांति का पावन पर्व मंगलवार को पूरे हिमाचल प्रदेश सहित उत्तर भारत में हर्षोल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया गया। प्रदेश के विभिन्न मंदिरों, गुरुद्वारों और पवित्र नदी घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लोगों ने स्नान कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।


कृषि प्रधान क्षेत्रों में यह पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाया गया। रबी की फसल के पककर तैयार होने पर किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे। खेतों में सुनहरी गेहूं की बालियों के बीच किसानों ने अपनी मेहनत का जश्न मनाया और भगवान का धन्यवाद किया।
सिख समुदाय के लिए यह दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है। वर्ष 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना की स्मृति में गुरुद्वारों में विशेष कीर्तन, अरदास और लंगर का आयोजन किया गया। अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर सहित प्रदेश के प्रमुख गुरुद्वारों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।


हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मंडी और कांगड़ा जिलों में बैसाखी के अवसर पर पारंपरिक मेलों का आयोजन किया गया। स्थानीय लोक संस्कृति की झलक के साथ लोगों ने नृत्य-संगीत का आनंद लिया। बच्चों और युवाओं में मेले को लेकर खासा उत्साह देखा गया।


प्रशासन द्वारा पर्व के मद्देनजर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पुलिस बल तैनात रहा ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बैसाखी संक्रांति ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि यह पर्व केवल फसल कटाई का उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

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