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प्रदेशभर में आपदा प्रबंधन को लेकर मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन, विभिन्न विभागों ने किया संयुक्त अभ्यास।

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फरयाड़ी नाला में क्लाउड बर्स्ट और तीर्थन नदी में जलस्तर बढ़ने की काल्पनिक स्थिति पर मेगा मॉक ड्रिल, विभिन्न विभागों ने किया संयुक्त अभ्यास


फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला कुल्लू बंजार।


प्रदेशभर में आपदा प्रबंधन एवं राहत-बचाव तैयारियों को परखने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल के तहत बंजार उपमंडल में भी विभिन्न विभागों द्वारा संयुक्त रूप से व्यापक अभ्यास किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान सुबह 9:20 बजे फरयाड़ी नाला में बादल फटने (क्लाउड बर्स्ट) तथा तीर्थन नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की काल्पनिक घटना का परिदृश्य तैयार किया गया।

सूचना मिलते ही प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग तथा अन्य आपदा प्रबंधन एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो गईं और राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास शुरू किया गया।


घटनास्थल से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, घायलों को निकालने तथा उन्हें त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ी रोपा में मेडिकल कैंप स्थापित किया गया, जहां आपदा प्रभावित लोगों के उपचार एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था का अभ्यास किया गया।


मेडिकल कैंप एवं स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. नीलम शर्मा के मार्गदर्शन एवं निगरानी में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. अपूर्वा ठाकुर, चिकित्सा अधिकारी गुशैणी तथा डॉ. घनश्याम शर्मा ने आपदा की स्थिति में घायलों के उपचार, प्राथमिक चिकित्सा तथा स्वास्थ्य प्रबंधन संबंधी कार्यों का सफल संचालन किया।


इसके अतिरिक्त फार्मासिस्ट लेखराज एवं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मचारियों ने भी राहत एवं बचाव कार्यों में सक्रिय योगदान दिया। चिकित्सा दल ने आपदा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, मरीजों की प्राथमिक जांच, दवाओं के वितरण तथा आपातकालीन उपचार व्यवस्था का सफल प्रदर्शन किया।

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अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार की मॉक ड्रिल का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना तथा आपदा के समय त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। साथ ही आम लोगों को यह संदेश देना भी है कि किसी भी आपदा की स्थिति में घबराने के बजाय सतर्कता, संयम और सामुदायिक सहयोग के साथ कार्य करना चाहिए।

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प्रशासन ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, बादल फटना, भूकंप, आगजनी एवं सड़क दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय-समय पर इस प्रकार के अभ्यास आवश्यक हैं। इनसे न केवल विभागीय तैयारियों का परीक्षण होता है, बल्कि आम नागरिकों में भी आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

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मॉक ड्रिल के सफल आयोजन में विभिन्न विभागों, स्वास्थ्य कर्मियों, स्वयंसेवकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा स्थानीय लोगों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि आपदा के समय सामूहिक प्रयास, समयबद्ध कार्रवाई और जागरूक नागरिकों की भूमिका ही जन-धन की हानि को न्यूनतम करने में सबसे अधिक सहायक सिद्ध होती है।

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