फ्रंट फेस न्यूज़ (राज शर्मा)आनी।
भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू तथा हिम संस्कृति शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हिम संस्कृति शोध संस्थान का प्रथम वार्षिक उत्सव शनिवार को आनी में धूमधाम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश की प्राचीन लिपियों, भाषाओं एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहे शोधकर्ताओं एवं इतिहासकारों को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर इतिहासकार शोध संस्थान हमीरपुर के संस्थापक एवं वरिष्ठ इतिहासकार चेत राम गर्ग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शास्त्री हीरा लाल ने किया तथा संस्थान की गतिविधियों एवं उद्देश्यों पर विस्तृत जानकारी दी।

समारोह के दौरान टाकरी पुरालेख प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें हिम संस्कृति शोध संस्थान द्वारा प्रदेश की प्राचीन लिपियों, पांडुलिपियों, लोकभाषाओं तथा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण हेतु किए जा रहे कार्यों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी ने उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

संस्थान के अध्यक्ष डॉ. यज्ञ दत्त ने अपने संबोधन में कहा कि हिम संस्कृति शोध संस्थान हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों एवं क्षेत्रों में प्राचीन लिपियों, संस्कृत, पहाड़ी भाषा तथा सांस्कृतिक इतिहास पर व्यापक शोध कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि किन्नौर से लेकर कांगड़ा तक शोधकर्ताओं की एक सशक्त टीम तैयार की गई है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए कार्यरत है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्रदेश के विद्यार्थियों को टाकरी सहित अन्य पारंपरिक लिपियों का प्रशिक्षण देने की योजना है। हिमाचल के गांवों में स्थित देवी-देवताओं के मंदिरों में प्राचीन काल से सुरक्षित पांडुलिपियों का संग्रह मौजूद है, जिनका हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद किया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास और संस्कृति से परिचित हो सकें।

कार्यक्रम में प्रदेश में इतिहास, संस्कृति, टाकरी लिपि तथा लोक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शोधकर्ताओं एवं इतिहासकारों को सम्मानित किया गया। जिला किन्नौर के शोधकर्ता रोहित कुमार को उनके विशेष शोध कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त कुल्लू, मंडी तथा अन्य जिलों से आए इतिहासकारों एवं शोधकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि चेत राम गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और इतिहास से होती है। इसलिए अपनी सांस्कृतिक धरोहर और पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि टाकरी लिपि और पहाड़ी भाषाओं के संरक्षण के लिए हिम संस्कृति शोध संस्थान का प्रयास सराहनीय है।

कार्यक्रम संयोजक नूतन शर्मा ने बताया कि आउटर सिराज क्षेत्र की समृद्ध देव संस्कृति पर भी गंभीर शोध कार्य किया जा रहा है। वहीं देवता भझारी कोट के कारदार भागे राम राणा ने टाकरी लिपि और पहाड़ी भाषा के प्रचार-प्रसार को समय की आवश्यकता बताते हुए इनके संरक्षण पर बल दिया।


इस अवसर पर शिक्षक श्यामानंद, राम सिंह ठाकुर, तिलक राज, हितेंद्र शर्मा, शिवराज शर्मा सहित संस्थान के अनेक सदस्य, शोधकर्ता, इतिहासकार तथा संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
समारोह का समापन हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं शोध कार्यों को और अधिक गति देने के संकल्प के साथ हुआ।








