फ्रंट पेज न्यूज़ डेस्क।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को देश की संवैधानिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, नागालैंड, तमिलनाडु, तेलंगाना और लद्दाख सहित कई राज्यों में राज्यपाल और उपराज्यपालों की नियुक्तियों में व्यापक बदलाव कर दिए। इस बड़े निर्णय के साथ देश के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपाल और उपराज्यपाल नियुक्त किए गए हैं।
राजनीतिक हलकों में इस फेरबदल को आने वाले चुनावों और प्रशासनिक संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सबसे बड़ा बदलाव राजधानी दिल्ली में देखने को मिला है। लंबे समय से दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में कार्य कर रहे वी. कुमार सक्सेना को दिल्ली से हटाकर लद्दाख का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी जगह भारत के पूर्व राजनयिक और अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया है। तरनजीत सिंह संधू को विदेश नीति और कूटनीतिक अनुभव के लिए जाना जाता है, इसलिए उनकी नियुक्ति को राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासनिक और अंतरराष्ट्रीय महत्व को देखते हुए अहम माना जा रहा है।
इसी क्रम में बिहार में भी बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके स्थान पर सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। सेना में लंबे समय तक सेवा देने वाले अता हसनैन को सुरक्षा और रणनीतिक मामलों का गहरा अनुभव है। हालांकि बिहार से हटने के बाद आरिफ मोहम्मद खान को फिलहाल कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले बड़ा बदलाव हुआ है। राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। आर.एन. रवि पूर्व में भारत की खुफिया एजेंसी और सुरक्षा तंत्र से जुड़े रहे हैं और उन्हें आंतरिक सुरक्षा मामलों का गहरा अनुभव है। आनंद बोस को भी फिलहाल कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
हिमाचल प्रदेश में भी राज्यपाल पद पर बदलाव किया गया है। वर्तमान राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को अब तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी जगह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल बनाया गया है। कविंदर गुप्ता लंबे समय तक जम्मू-कश्मीर की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और वे जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष तथा उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। हिमाचल जैसे संवेदनशील और पहाड़ी राज्य में उनकी नियुक्ति को प्रशासनिक अनुभव के आधार पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को अब महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। जिष्णु देव वर्मा त्रिपुरा के शाही परिवार से संबंध रखते हैं और राज्य की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं।
वहीं वरिष्ठ भाजपा नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया है। नंद किशोर यादव बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
दक्षिण भारत में भी एक अहम बदलाव किया गया है। केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को अब तमिलनाडु का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। आर्लेकर गोवा की राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं और उन्हें संगठन और प्रशासन दोनों का अनुभव है।
कुल मिलाकर केंद्र सरकार के इस फैसले से देश के कई महत्वपूर्ण राज्यों में संवैधानिक नेतृत्व बदल गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल आने वाले विधानसभा चुनावों और प्रशासनिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए किया गया है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे संवेदनशील राज्यों में नए चेहरों की नियुक्ति को आगामी राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।






























