फ्रंट पेज न्यूज़ नई दिल्ली।
दशकों से चले आ रहे जटिल और बोझिल प्रावधानों में बदलाव करते हुए आयकर विभाग ने ‘आयकर नियम, 2026’ का मसौदा जारी कर दिया है। प्रस्तावित नियमों का फोकस साफ है—आम करदाता, मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों को अनावश्यक कागजी झंझट से मुक्ति देना और बैंकिंग व व्यावसायिक लेनदेन को ज्यादा व्यावहारिक बनाना। खास तौर पर पैन कार्ड की अनिवार्यता से जुड़े नियमों में बड़े और दूरगामी बदलाव सुझाए गए हैं।
अब तक बैंक या डाकघर में एक दिन में ₹50,000 से अधिक नकद जमा करने पर पैन देना अनिवार्य था, जिससे रोज़मर्रा के छोटे-छोटे लेनदेन करने वालों को परेशानी होती थी। नए मसौदे में इस डेली लिमिट को खत्म कर सालाना लिमिट लागू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत पूरे वित्तीय वर्ष में कुल ₹10 लाख या उससे अधिक की नकद जमा या निकासी होने पर ही पैन देना जरूरी होगा। इससे वे लोग राहत महसूस करेंगे, जो नियमित अंतराल पर छोटी रकम का लेनदेन करते हैं।
वाहन खरीद के नियमों में भी अहम बदलाव प्रस्तावित हैं। अभी तक किसी भी चार पहिया वाहन की खरीद पर, कीमत चाहे जितनी भी हो, पैन अनिवार्य था। नए नियमों के अनुसार ₹5 लाख से कम कीमत के चार पहिया वाहन खरीदने पर पैन की जरूरत नहीं होगी। वहीं दूसरी ओर, पहली बार महंगे दोपहिया वाहनों पर नजर डालते हुए यह प्रस्ताव रखा गया है कि यदि बाइक या स्कूटर की कीमत ₹5 लाख से अधिक है, तो पैन देना अनिवार्य होगा।
पर्यटन और सेवा क्षेत्र को गति देने के उद्देश्य से होटल, रेस्तरां और इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े भुगतान नियमों में भी ढील दी गई है। पहले ₹50,000 से अधिक के बिल पर पैन देना पड़ता था, जिसे बढ़ाकर ₹1 लाख करने का प्रस्ताव है। यही सीमा बैंक्वेट हॉल, सम्मेलन केंद्र और इवेंट मैनेजमेंट सेवाओं पर भी लागू होगी, जिससे आयोजकों और ग्राहकों दोनों को सुविधा मिलेगी।
अचल संपत्ति के क्षेत्र में पारदर्शिता और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए पैन की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का सुझाव दिया गया है। अब प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री या उपहार से जुड़े सौदों में ₹20 लाख से अधिक की राशि होने पर ही पैन का उल्लेख करना होगा, जिससे छोटे सौदों में अनावश्यक औपचारिकताओं से छुटकारा मिलेगा।
बीमा क्षेत्र में हालांकि सख्ती बरकरार रखने का संकेत है। मसौदे के अनुसार, बीमा कंपनियों के साथ किसी भी प्रकार का खाता-आधारित संबंध—जैसे पॉलिसी खरीदना—शुरू करने के लिए पैन अनिवार्य होगा, ताकि वित्तीय ट्रैकिंग और अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
कुल मिलाकर, ये प्रस्तावित बदलाव डिजिटल इकोनॉमी को मजबूत करने और करदाताओं के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को वास्तविक अर्थों में लागू करने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। सरकार ने इन नियमों पर 22 फरवरी 2026 तक आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। यदि अंतिम रूप से इन्हें मंजूरी मिलती है, तो 1 अप्रैल 2026 से ये नियम लागू हो जाएंगे—और तब आम आदमी के लिए रोजमर्रा के वित्तीय काम कहीं ज्यादा आसान और कम तनावपूर्ण हो सकते हैं




























