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सीबीएसई स्कूलों में स्टाफ नियुक्ति को लेकर बढ़ी चिंता, विद्यार्थियों के हित में शीघ्र निर्णय ले सरकार: कुन्दन शर्मा।

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फ्रंट पेज न्यूज़आनी/कुल्लू।

हिमाचल प्रदेश में सरकारी विद्यालयों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध करने की महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में हो रही देरी को लेकर शिक्षा जगत में चिंता बढ़ने लगी है। हिमाचल प्रदेश राजकीय पदोन्नत प्रवक्ता संघ जिला कुल्लू के अध्यक्ष एवं राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक कुन्दन शर्मा ने कहा है कि सरकार को विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति संबंधी प्रक्रिया पर शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।

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कुन्दन शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। प्रदेश सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों और सुधारों का सकारात्मक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न रैंकिंग में देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि पीजीआई 2.0-2026 में हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर छठा तथा राज्यों की श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है।

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वहीं नेशनल अचीवमेंट सर्वे-2025 में प्रदेश ने 21वें स्थान से छलांग लगाकर पांचवां स्थान हासिल किया है। इसके अतिरिक्त प्रदेश ने पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य राष्ट्रीय लक्ष्य वर्ष 2030 से पांच वर्ष पहले ही प्राप्त कर लिया है।
उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों का श्रेय सरकार की नीतियों के साथ-साथ विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की मेहनत और समर्पण को भी जाता है।

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100 सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई से जोड़ने की हुई थी घोषणा
कुन्दन शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 15 अगस्त 2025 को प्रदेश के चयनित सरकारी विद्यालयों को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के स्थान पर सीबीएसई से संबद्ध करने की घोषणा की थी। इसके बाद 25 सितंबर 2025 को शिक्षा विभाग ने 100 सरकारी विद्यालयों में इस योजना को लागू करने के आदेश जारी किए। 19 जनवरी 2026 को जारी अधिसूचना में इन विद्यालयों के लिए शिक्षकों का अलग सब-कैडर बनाने का प्रावधान किया गया।

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हालांकि इस निर्णय का विभिन्न शिक्षक संगठनों ने विरोध किया और ज्वाइंट टीचर फेडरेशन ने 3 मार्च 2026 को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने 9 मई 2026 को अपने निर्णय में सरकार की प्रक्रिया को उचित ठहराया। इसके बाद 22 मार्च 2026 को सीबीएसई विद्यालयों में नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा का परिणाम घोषित किया गया तथा 27 श्रेणियों के लिए मेरिट सूची भी जारी कर दी गई।

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सीबीएसई विद्यालयों में बढ़ा नामांकन
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से सत्र के आरंभ में सरकारी विद्यालयों में नामांकन में गिरावट देखने को मिल रही थी, लेकिन इस वर्ष स्थिति अलग रही। सीबीएसई से संबद्ध किए गए विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अपने बच्चों को निजी विद्यालयों से निकालकर सरकारी सीबीएसई विद्यालयों में दाखिला दिलाया है।

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उनका मानना है कि इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि अभिभावक सरकार की इस योजना पर विश्वास जता रहे हैं और वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में अपने बच्चों को राष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली से जोड़ना चाहते हैं।
तीन माह बाद भी लंबित है नियुक्ति प्रक्रिया
कुन्दन शर्मा ने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए लगभग तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इन विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।

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उन्होंने कहा कि यदि नियुक्तियां मेरिट के आधार पर की जानी थीं, तो अब प्रक्रिया में देरी और पुनर्विचार की स्थिति समझ से परे है।
उन्होंने कहा कि लगातार समितियों के गठन और निर्णयों में हो रही देरी के कारण अभिभावकों और विद्यार्थियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।

जिस उत्साह के साथ अभिभावकों ने अपने बच्चों को सरकारी सीबीएसई विद्यालयों में प्रवेश दिलाया था, उसमें धीरे-धीरे कमी देखने को मिल रही है।

कुन्दन शर्मा ने सरकार से आग्रह किया कि सीबीएसई विद्यालयों में योग्य शिक्षकों की शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित की जाए तथा आवश्यक आधारभूत सुविधाएं और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो इस महत्वाकांक्षी योजना के निर्धारित उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों को प्राप्त करना कठिन हो सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार विद्यार्थियों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल्द ही इस विषय में स्पष्ट और सकारात्मक निर्णय लेगी।

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