मौसमक्रिकेटईरान इस्राइल युद्धमेले और त्यौहारस्पोर्ट्सबॉलीवुडजॉब - एजुकेशनबिजनेसलाइफस्टाइलदेश-विदेशराशिफलआध्यात्मिक

तीर्थन घाटी में हाईटेक पोर्टेबल बायोमास बुखारी का प्रदर्शन, कचरे से बनेगी स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा

फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार।
कुल्लू जिले की प्रसिद्ध तीर्थन घाटी में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल देखने को मिली। रविवार को घाटी के गुशैनी और बठाहड़ क्षेत्र में बायोमास ऊर्जा प्रणाली पर आधारित एक पोर्टेबल हाईटेक बुखारी का लाइव प्रदर्शन किया गया। इस डेमो के दौरान स्थानीय लोगों, पर्यटन कारोबारियों और होमस्टे संचालकों को यह दिखाया गया कि कैसे कृषि अपशिष्ट, सूखी लकड़ी के छोटे टुकड़े और अन्य स्थानीय जैविक ईंधन का उपयोग कर एक ही उपकरण से खाना पकाने, कमरे को गर्म रखने और पानी गर्म करने जैसी कई जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।


इस तकनीक का प्रदर्शन प्रज्ञानम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, हमीरपुर के सहयोग से आयोजित किया गया। कंपनी के को-फाउंडर अश्वनी शर्मा ने बताया कि तीर्थन घाटी के गुशैनी नागनी स्थित कलियुगा रिसॉर्ट और बठाहड़ क्षेत्र में इस बायोमास आधारित बुखारी-तंदूर प्रणाली का लाइव डेमो दिया गया। इस मौके पर पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों, होमस्टे संचालकों और स्थानीय ग्रामीणों को विस्तार से बताया गया कि यह तकनीक पहाड़ी क्षेत्रों में ऊर्जा के बेहतर उपयोग और पर्यावरण संरक्षण में किस तरह सहायक हो सकती है।


हमीरपुर जिले के बाहली गांव निवासी रोहित शर्मा और अश्वनी शर्मा ने बताया कि पहाड़ी और बर्फीले इलाकों में रहने वाले लोगों को अक्सर ईंधन और ऊर्जा के लिए अधिक खर्च करना पड़ता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पारंपरिक तंदूर और बुखारी की अवधारणा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर एक हाईटेक पोर्टेबल बुखारी तैयार की है। यह बुखारी केवल कमरे को गर्म रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ओवन, स्टीमर और गीजर जैसी सुविधाएँ भी एक साथ उपलब्ध करवाई गई हैं, जिससे इसे बहुउद्देश्यीय ऊर्जा उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।


इस हाईटेक बुखारी की खासियत यह भी है कि यह पारंपरिक लकड़ी आधारित बुखारियों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत तक कम लकड़ी की खपत करती है। इससे न केवल ईंधन की बचत होती है बल्कि पर्यावरण पर पड़ने वाला दबाव भी कम होता है। जानकारी के अनुसार यह बुखारी लगभग तीन फुट ऊंची है और इसमें करीब 20 लीटर पानी गर्म करने की क्षमता है। इसमें पानी निकालने के लिए एक नल भी लगाया गया है, जबकि भाप तैयार करने के लिए अलग स्टीम सिस्टम दिया गया है। खाना बनाने के बाद यह बुखारी कमरे को लगभग 7 से 8 घंटे तक गर्म रख सकती है, जो ठंडे और बर्फीले इलाकों के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है।


इस बुखारी को पूरी तरह पोर्टेबल बनाया गया है। इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाने के लिए इसमें चार मजबूत पहिए लगाए गए हैं। यही कारण है कि इसे घरों, होमस्टे, कैंपिंग साइट और पर्यटन स्थलों पर आसानी से उपयोग में लाया जा सकता है।


रोहित शर्मा और अश्वनी शर्मा ने इस नवाचार का प्रोटोटाइप तैयार कर इसे एनआईटी हमीरपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्टार्टअप शिखर सम्मेलन 2026 में भी प्रस्तुत किया था। इस प्रतियोगिता में उनके इस प्रोटोटाइप को इन्क्यूबेशन के लिए चयनित किया गया और इसे दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। इसके लिए दोनों युवकों को 30 हजार रुपये का पुरस्कार भी दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर विकसित किया गया तो यह पहाड़ी क्षेत्रों में ऊर्जा के वैकल्पिक और टिकाऊ स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


रोहित शर्मा और अश्वनी शर्मा के अनुसार बाजार में उपलब्ध टर्किश बुखारी कुछ हद तक इसी तरह की सुविधाएँ प्रदान करती है, लेकिन उसमें पानी के भंडारण और इनबिल्ट स्टीमर जैसी सुविधाएँ नहीं होतीं। टर्किश बुखारी की कीमत जहां बाजार में लगभग एक लाख रुपये तक होती है, वहीं इस हाईटेक बुखारी की संभावित कीमत करीब 40 हजार रुपये रखी गई है, जिससे यह आम लोगों और छोटे पर्यटन कारोबारियों के लिए अधिक किफायती विकल्प बन सकती है।


तीर्थन घाटी में आयोजित इस डेमो के दौरान स्थानीय पर्यटन कारोबारियों और होमस्टे संचालकों ने इस तकनीक में विशेष रुचि दिखाई। उनका कहना है कि यदि इस तरह की प्रणाली घाटी में अपनाई जाती है तो इससे एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम होगी और बढ़ती गैस कीमतों से भी राहत मिलेगी। साथ ही पर्यटन उद्योग को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा का एक नया विकल्प मिल सकेगा।


इस अवसर पर तीर्थन संरक्षण एवं पर्यटन विकास एसोसिएशन के अध्यक्ष वरुण भारती, उपाध्यक्ष अमन नेगी, ग्राम पंचायत मशयार के पूर्व उप प्रधान एवं पर्यटन कारोबारी ठेवा राम सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने इस नवाचार को पहाड़ी क्षेत्रों के लिए उपयोगी बताते हुए इसके व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि अपशिष्ट और स्थानीय जैविक ईंधन को स्वच्छ ऊर्जा में बदलने वाली यह तकनीक भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों के लिए एक प्रभावी समाधान बन सकती है। खासकर पहाड़ी और ठंडे इलाकों में जहां ऊर्जा संसाधन सीमित होते हैं, वहां इस तरह की तकनीक ऊर्जा बचत, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।


प्रज्ञानम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के को-फाउंडर अश्वनी शर्मा ने बताया कि फिलहाल इस बुखारी-तंदूर का बेस मॉडल तैयार किया गया है और इसे लोगों के बीच प्रदर्शन के माध्यम से समझाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कस्टमर ट्रायल के बाद मिलने वाले फीडबैक के आधार पर इसमें और सुविधाएँ जोड़ी जाएँगी तथा इसे और अधिक बजट-फ्रेंडली बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। उनका कहना है कि आने वाले समय में इस बायोमास आधारित तंदूर के कई अलग-अलग मॉडल बाजार में उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों और पर्यटन स्थलों को स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा का एक भरोसेमंद विकल्प मिल सकेगा।

Leave a Reply

You cannot copy content of this page