फ्रंट पेज न्यूज़ आनी (राज शर्मा)।
राजकीय महाविद्यालय आनी, हरिपुर में समाजशास्त्र विभाग द्वारा “संस्कृति की विरासत: कल, आज और कल” विषय पर एक गरिमामय सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय एवं स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ते हुए आधुनिक जीवन के साथ उनकी प्रासंगिकता को समझाना रहा। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दायक राम ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ समाजशास्त्र विभाग की समाजशास्त्रीय अन्वेषण सोसायटी की अध्यक्षा प्रो. सीमा द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृति हमारी पहचान की मूल धुरी है, जो समाज को एकता, सौहार्द और नैतिक मूल्यों से जोड़ती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया और कहा कि परंपराओं से ही समाज की आत्मा जीवित रहती है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्थानीय त्योहारों पर आधारित पारंपरिक स्वांग, लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और लोकधुनों ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया और उपस्थित जनसमूह को पहाड़ी लोकजीवन की जीवंत झलक देखने को मिली।

महाविद्यालय परिसर में लगाई गई सांस्कृतिक प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी में पुराने घरेलू बर्तन, पारंपरिक लोहे के औजार और अन्य सांस्कृतिक धरोहरों को प्रदर्शित किया गया। इन वस्तुओं के माध्यम से पूर्वजों की सादगीपूर्ण जीवनशैली, श्रमशीलता और सामाजिक मूल्यों को दर्शाया गया। प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि हमारी सांस्कृतिक विरासत ही हमारे भविष्य की सशक्त आधारशिला है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. दायक राम ठाकुर ने समाजशास्त्र विभाग को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य को दिशा देने वाली ऊर्जा है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाना समय की आवश्यकता है, लेकिन अपनी परंपराओं को भूल जाना उचित नहीं है। प्रगति और परंपरा के बीच संतुलन ही समाज को सही दिशा दे सकता है।
इस अवसर पर प्रो. नरेंद्र पॉल, डॉ. संगीता नेगी, प्रो. अशोक, प्रो. निर्मल, प्रो. संजय दत्त, प्रो. विजय, प्रो. पुष्पा गुलेरिया, प्रो. राधिका, अधीक्षक, महाविद्यालय का समस्त गैर-शिक्षक वर्ग, समाजशास्त्रीय अन्वेषण सोसायटी के सदस्य तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने, लोकसंस्कृति को समझने और आधुनिकता के बीच परंपराओं के महत्व को आत्मसात करने का प्रेरणादायक मंच साबित हुआ।




























