फ्रंट पेज न्यूज़ शिमला।
हिमाचल प्रदेश पेंशनभोगी संघ ने प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की है कि केंद्र सरकार द्वारा हिमाचल सरकार की रेवेन्यू डैफिसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद किए जाने की आड़ में पेंशनरों, कर्मचारियों और आम जनता पर आर्थिक प्रतिबंध थोपने के प्रस्ताव रखने वाले प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार को “जनहित” में तुरंत पद से हटाया जाए।

संघ के प्रदेशाध्यक्ष एल.आर. गुलशन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेंद्र कुमार, महासचिव मिलाप चंद सहित विभिन्न जिलों और खंडों के पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान में कहा कि गत रविवार को मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल सदस्यों, विधायकों और मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की गई वित्तीय प्रस्तुति में ऐसे कड़े आर्थिक कदम सुझाए गए, जो सीधे तौर पर पेंशनरों, कर्मचारियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को प्रभावित करेंगे।
संघ का आरोप है कि आरडीजी बंद होने से उत्पन्न वित्तीय संकट से उबरने के नाम पर जनविरोधी प्रतिबंधों का प्रस्ताव प्रदेश की जनता पर अतिरिक्त बोझ डालेगा। नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि वित्त विभाग प्रदेश हितैषी है, तो प्रस्तुति में उच्च अधिकारियों, मंत्रियों, विधायकों, बोर्ड-निगम अध्यक्षों एवं सलाहकारों के वेतन-भत्तों और अन्य सुविधाओं में कटौती या फ्रीज़ करने का प्रस्ताव क्यों नहीं रखा गया।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष एल.आर. गुलशन ने कहा कि इस प्रकार के “तुगलकी फरमान” सरकार की साख को नुकसान पहुंचाएंगे और प्रदेश की लगभग 75 लाख आबादी में गलत संदेश जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ऐसे प्रस्ताव वापस नहीं लिए गए, तो आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार के लिए “मिशन रिपीट” की राह कठिन हो सकती है।
पेंशनभोगी संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी सुनियोजित तरीके से सरकार की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। संघ ने मांग की कि मनमाने ढंग से कार्य करने वाले अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाया जाए।
अंत में संघ ने स्पष्ट किया कि पेंशनर एवं कर्मचारी विरोधी किसी भी प्रस्ताव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही सरकार से आग्रह किया गया कि मार्च में प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले बजट में पेंशनरों और कर्मचारियों की लंबित वित्तीय देनदारियों का एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित किया जाए।




























