फ्रंट पेज न्यूज़ मंडी।
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव–2026 के पावन अवसर पर छोटी काशी मंडी एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक भव्यता के चरम पर दिखाई दी, जब ब्यास नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक पंचवक्त्र महादेव मंदिर के समीप भव्य ब्यास महाआरती का आयोजन किया गया।

हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति, दीपों की अलौकिक आभा, वैदिक मंत्रों की गूंज और ब्यास तट पर बहती आस्था की अविरल धारा ने पूरे वातावरण को देवमय बना दिया। इस दिव्य आयोजन में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और आरती में सहभागिता करते हुए ब्यास नदी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि नई ऊर्जा और उत्साह के साथ शुरू हुई ब्यास महाआरती आने वाले समय में मंडी की स्थायी पहचान बनेगी और शिवरात्रि महोत्सव की परंपराओं में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ देगी। उन्होंने शिवरात्रि महोत्सव आम सभा के अध्यक्ष एवं विधायक चंद्रशेखर तथा उपायुक्त अपूर्व देवगन को इस भव्य और अनुकरणीय आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मंडी की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला प्रयास भी है।

आरती की समस्त विधि वाराणसी से विशेष रूप से आए पांच विद्वान पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न करवाई गई, जिससे पूरा तट काशी की गंगा आरती जैसा दिव्य दृश्य प्रस्तुत करने लगा। इस वर्ष मंडी नगर अपनी स्थापना के 500वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और इस ऐतिहासिक पड़ाव को यादगार बनाने के लिए नगर के गौरवशाली इतिहास और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता आकर्षक लेजर शो भी प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाने में शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों का उल्लेखनीय योगदान रहा।

कार्यक्रम में विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा, विधायक चंद्रशेखर, पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, प्रकाश चौधरी, पूर्व मुख्य संसदीय सचिव सोहन लाल ठाकुर, जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशी शर्मा, एपीएमसी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष चंपा ठाकुर, पूर्व प्रत्याशी नरेश चौहान, उपायुक्त अपूर्व देवगन और पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में नगरवासी और श्रद्धालु इस अद्भुत आध्यात्मिक क्षण के साक्षी बने।
दीपों की पंक्तियों से जगमगाता ब्यास तट, मंत्रों की गूंज और श्रद्धालुओं की एकाग्र आस्था ने यह संकेत दे दिया है कि ब्यास महाआरती अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि मंडी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान बनने की दिशा में अग्रसर एक नई परंपरा है।




























