फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार।
कुल्लू जिला के बंजार उपमंडल में पिछली भारी बरसात के बाद सड़कों को हुई भारी क्षति का असर आज भी साफ दिखाई दे रहा है। हैरानी की बात यह है कि कई महीने बीत जाने के बाद भी सड़कों का पुनरुत्थान अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है। क्षेत्र की अधिकांश सड़कें अभी तक पूरी तरह सामान्य यातायात के लिए बहाल नहीं हो सकी हैं, जिससे आम जनता को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बंजार उपमंडल की पेडचा–ग्राहों, बंजार–तांदी, बंजार–चनौन, बंजार–गलबाहधार, बंजार–विहार, बंजार–कोटला, बंजार–शर्ची, बंजार–जौरी और बंजार–कलवारी जैसी कई महत्वपूर्ण सड़कें अभी भी बेहद खराब हालत में हैं। इन मार्गों पर मुश्किल से छोटी गाड़ियां ही चल पा रही हैं, जबकि बड़े वाहनों और सार्वजनिक परिवहन की आवाजाही लगभग ठप पड़ी है।

कामगार संगठन बंजार की अध्यक्षता भावना चौहान का कहना है कि सरकार , अधिकारी और ठेकेदार में समन्वय ना होने से ऐसी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमराई
सड़कें खराब होने के कारण क्षेत्र में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था भी लगभग चरमराकर रह गई है। बस सेवाएं प्रभावित होने से लोगों को निजी छोटी गाड़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसके लिए उन्हें भारी किराया चुकाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना स्कूल, अस्पताल और बाजार जाने के लिए उन्हें आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। इससे विशेष रूप से विद्यार्थियों, बुजुर्गों और कर्मचारियों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

होटल व्यवसाई पवन शर्मा का कहना है कि न 305 की बदहाली से पर्यटन व्यवसाय हाशय पर चला गया है।
एनएच-305 की हालत भी चिंताजनक
बंजार क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली एनएच-305 की हालत भी चिंताजनक बनी हुई है। पिछले दो-तीन वर्षों से यह मार्ग कई स्थानों पर गांव की कच्ची सड़कों से भी बदतर स्थिति में पहुंच चुका है।
विभाग की ओर से बंजार से औट तक पैचवर्क तथा बंजार–घियागी मार्ग पर एज-टू-एज टायरिंग के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। कई जगह नालियों की व्यवस्था भी नहीं है, जिससे बरसात के समय स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।

टेंडर हुए, काम शुरू नहीं
सूत्रों के अनुसार दिसंबर 2025 में बंजार और कोर्ट के बीच पैचवर्क के टेंडर लगाए गए थे, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। दूसरी ओर बंजार-घियागी एज-टू-एज टायरिंग का कार्य भी कछुआ गति से चल रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि टेंडर में निर्धारित समय सीमा के बावजूद ठेकेदार अपनी सुविधा के अनुसार काम कर रहे हैं और विभाग की ओर से भी सख्ती नहीं दिखाई दे रही।
बरसात से पहले चिंता
अब क्षेत्र में चिंता का विषय यह है कि अगली बरसात भी नजदीक आ रही है, लेकिन सड़क सुधार कार्य अभी तक व्यवस्थित रूप से शुरू नहीं हो पाया है। यदि समय रहते मरम्मत और टायरिंग का काम पूरा नहीं हुआ तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
उपेक्षा का शिकार बनता बंजार
बंजार जैसे बड़े और पर्यटन संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र में सड़कों की यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डिजास्टर के बाद क्षेत्र की मूलभूत सुविधाएं ही बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं और अब तक स्थिति पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाई है।
जनता का सवाल है कि आखिर सरकार, विभाग और ठेकेदारों के बीच समन्वय की कमी कब दूर होगी और बंजार की सड़कों को कब राहत मिलेगी।


अधिशासी अभियंता किशोरी लाल सुमन ने स्पष्ट किया कि घ्यागी से बंजार एनएच–305 की एज-टू-एज टायरिंग के कार्य में जहां नालियों की आवश्यकता होगी, वहां नालियां बनाई जाएंगी। जहां नालियों की आवश्यकता नहीं होगी, वहां सड़क को चौड़ा ही रखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस कार्य को शीघ्र पूरा करने के लिए विभाग द्वारा प्रयास तेज कर दिए गए हैं। बंजार–औट सड़क पर गटका बिछाने का कार्य पूरा कर लिया गया है और टायरिंग का काम भी जल्द ही शुरू किया जाएगा।
निष्कर्ष
बंजार क्षेत्र की सड़कों की बदहाल स्थिति केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्राकृतिक आपदा के बाद पुनर्निर्माण कार्यों में अपेक्षित गति न होना यह दर्शाता है कि योजनाओं और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर मौजूद है। सरकार, विभाग और ठेकेदारों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। पर्यटन की संभावनाओं से भरपूर बंजार जैसे क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की यह हालत चिंताजनक है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार संस्थाएं कब तक स्थिति को गंभीरता से लेकर सड़कों को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए ठोस कदम उठाती हैं।















