फ्रंट पेज न्यूज़ मंडी।
सरकार की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाली योजनाएं अब ज़मीन पर सकारात्मक परिणाम देने लगी हैं। इसका ताज़ा उदाहरण मंडी जिले के किसान सुरेश कुमार हैं, जिन्होंने पालमपुर से उपलब्ध करवाए गए 100 किलोग्राम हल्दी के बीज से अपनी एक बीघा भूमि में हल्दी की प्राकृतिक खेती शुरू की। आज उनकी फसल लगभग तैयार है और बेहतर उत्पादन की उम्मीद दिखाई दे रही है।

सुरेश कुमार का कहना है कि हल्दी की फसल को जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते, जिससे फसल सुरक्षा को लेकर किसानों की चिंता काफी हद तक कम हो गई है। इस खेती के चलते न केवल उनकी आय के नए रास्ते खुले हैं, बल्कि लंबे समय से बंजर पड़े खेत भी दोबारा आबाद होने लगे हैं।
दूरदर्शी और किसान-हितैषी पहल
इस सफलता से उत्साहित सुरेश कुमार आगामी सीजन में दो बीघा भूमि में हल्दी की प्राकृतिक खेती करने की योजना बना रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की यह योजना किसानों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। एक ओर जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से आय की गारंटी मिल रही है, वहीं प्राकृतिक खेती अपनाने से लागत में भारी कमी आई है।

सुरेश कुमार ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल दूरदर्शी होने के साथ-साथ पूरी तरह किसान-हितैषी है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती और हल्दी उत्पादन अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया।
जिला मंडी में हल्दी खरीद से किसानों को सीधा लाभ
कृषि विभाग के उप परियोजना अधिकारी हितेंद्र रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान जिला मंडी में 15 किसानों से कुल 2.982 मीट्रिक टन कच्ची हल्दी की खरीद की गई। यह खरीद 90 रुपये प्रति किलोग्राम के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई, जिससे किसानों के खातों में लगभग 2.68 लाख रुपये सीधे विभाग द्वारा डाले गए।
उन्होंने अन्य किसानों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की, ताकि खेती को लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।
















