फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार (परस राम भारती)।
हिमालय के नाजुक पर्यावरण को बचाने की दिशा में अब केवल सरकार या स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि पर्यटक भी अपनी जिम्मेदारी निभाने लगे हैं। इसी सकारात्मक सोच का उदाहरण तीर्थन घाटी में देखने को मिला, जहां दिल्ली से आए पर्यावरण प्रेमी यात्रियों के एक समूह ने प्रकृति के साथ तालमेल बिठाते हुए जिम्मेदार पर्यटन का संदेश दिया।
यह समूह हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध तीर्थन घाटी में स्थित Great Himalayan National Park के इको जोन में पहुंचा, जो UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इस क्षेत्र की जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए यहां पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।

पर्यावरण के प्रति जागरूकता का अनूठा उदाहरण
दिल्ली से आए इस यात्रा दल का नेतृत्व अक्षश गुप्ता, आशीष वासु, सागर और गौरव ने किया। उनके साथ करीब 20 अन्य पर्यटक भी शामिल थे। यह समूह तीर्थन घाटी के हामणी क्षेत्र में स्थित सनशाइन हिमालयन कॉटेज में ठहरा, जिसे टाटा 1एमजी द्वारा समर्थित बताया जाता है।
यह कॉटेज पारंपरिक काठकुनी वास्तुकला शैली में स्थानीय लकड़ी और पत्थर से बनाया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों की यह पारंपरिक निर्माण शैली न केवल पर्यावरण के अनुकूल होती है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और स्थापत्य कला की झलक भी प्रस्तुत करती है।
प्लास्टिक मुक्त यात्रा का संकल्प
यात्रा के दौरान इस समूह ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने पैकेज्ड कोल्ड ड्रिंक और बोतलबंद पानी का इस्तेमाल पूरी तरह से छोड़ दिया। इसके स्थान पर स्थानीय हिमालयी पेय पदार्थों को अपनाया गया, जिससे प्लास्टिक कचरे के निर्माण को रोका जा सका।

समूह के सदस्यों ने सुरक्षित स्थानीय जल स्रोतों का उपयोग किया और अपने साथ व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं—जैसे टूथब्रश और अन्य आवश्यक सामान—पहले से ही लेकर आए, ताकि अनावश्यक प्लास्टिक और कचरा पैदा न हो।
पौधारोपण कर दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
पर्यावरण संरक्षण को केवल बातों तक सीमित न रखते हुए पर्यटकों ने तीर्थन घाटी में पौधारोपण भी किया। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों और अन्य पर्यटकों को भी पर्यावरण संरक्षण और जलवायु जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया।
सनशाइन हिमालयन कॉटेज के मालिक और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता पंकी सूद ने बताया कि पर्यटन के लगातार बढ़ते दबाव के कारण हिमाचल के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों—जैसे मनाली, शिमला और तीर्थन घाटी—में प्लास्टिक कचरे की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि यदि पर्यटक स्वयं जिम्मेदारी लें, तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से सनशाइन हिमालयन कॉटेज अपने यहां ठहरने वाले उन मेहमानों को “ग्रीन क्रेडिट्स” प्रदान करता है, जो प्लास्टिक कचरा नहीं बनाते और पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार अपनाते हैं।
हिमालय को बचाने की दिशा में जरूरी पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों का पारिस्थितिकी तंत्र बेहद संवेदनशील है। यदि पर्यटन गतिविधियां अनियंत्रित तरीके से बढ़ती हैं और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी होती है, तो इससे प्राकृतिक संतुलन को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
ऐसे में तीर्थन घाटी में पर्यटकों द्वारा की गई यह पहल एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि अब कई पर्यटक केवल घूमने के लिए नहीं आते, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा को भी उतना ही महत्व देने लगे हैं।
यदि इस तरह के प्रयास लगातार जारी रहे, तो हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को बचाए रखने में बड़ी मदद मिल सकती है।



























