लकड़ी और पत्थर की नक्काशी से सजेगा मंदिर, धार्मिक पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
आनी, 12 मार्च।
देवभूमि आनी प्राचीन काल से ही धार्मिक आस्था, साधना और तपोस्थली के रूप में जानी जाती रही है। यहां स्थित कई प्राचीन मंदिर क्षेत्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को संजोए हुए हैं। इन्हीं में से एक आनी मुख्यालय के कोर्ट रोड पर स्थित दुर्गा माता मंदिर भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस मंदिर में देवी माता पछला के स्वरूप में दुर्गा माता की पूजा-अर्चना की जाती है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु भी नियमित रूप से यहां माथा टेकने पहुंचते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
मंदिर को अधिक भव्य, आकर्षक और सुरक्षित स्वरूप देने के उद्देश्य से वर्ष 2025 से इसके पुनर्निर्माण और सौंदर्यकरण का कार्य शुरू किया गया है। नए मंदिर भवन का निर्माण पारंपरिक पहाड़ी स्थापत्य शैली में किया जा रहा है, जो हिमाचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शाएगा। मंदिर निर्माण में लकड़ी और पत्थर की पारंपरिक नक्काशी का विशेष उपयोग किया जा रहा है, जिससे इसकी सुंदरता और आध्यात्मिक गरिमा और अधिक बढ़ेगी। माना जा रहा है कि नए स्वरूप में तैयार होने के बाद यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र रहेगा बल्कि क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी नई दिशा देगा।
मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य की जिम्मेदारी जिला कुल्लू के प्रसिद्ध शिल्पकार उत्तम भारद्वाज के मार्गदर्शन में निभाई जा रही है। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण में आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक शिल्पकला का संतुलित समन्वय किया जा रहा है, ताकि भवन की मजबूती और कलात्मक सौंदर्य दोनों सुरक्षित रह सकें। जानकारी के अनुसार मंदिर निर्माण कार्य को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और वर्तमान में निर्माण कार्य तेजी से जारी है।
मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य का शुभारंभ दुर्गा माता मंदिर कमेटी द्वारा विधि-विधान के साथ हवन, पाठ और यज्ञ के आयोजन से किया गया। इस पावन अवसर पर कमेटी के प्रधान वीरेंद्र मल्होत्रा, व्यापार मंडल अध्यक्ष विनोद चंदेल, कीरत राम शर्मा, ललित शर्मा, रिंकू सूद, धर्मेंद्र गुप्ता और मंदिर के पुजारी नारायण बोध सहित कमेटी के अन्य सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी श्रद्धालुओं ने माता दुर्गा से प्रार्थना की कि मंदिर निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो और यह पवित्र स्थल आने वाले समय में आस्था, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बने।
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