उपायुक्त अपूर्व देवगन ने किया पारंपरिक स्वागत • टारना माता मंदिर में सात दिन देंगे भक्तों को आशीर्वाद • 216 देवी-देवताओं के आगमन से सजेगी छोटी काशी
फ्रंट पेज न्यूज़ मंडी।
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव–2026 के शुभारंभ से पूर्व आज मंडी नगरी उस आध्यात्मिक क्षण की साक्षी बनी, जब जनपद के आराध्य बड़ा देव कमरूनाग देवध्वनियों, वाद्य यंत्रों और पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच नगर में पधारे।

उनके आगमन के साथ ही छोटी काशी की फिजा पूरी तरह शिवमय हो उठी और सदियों पुरानी देव परंपरा के कारज विधिवत शुरू हो गए।

राज माधोराय मंदिर परिसर में उपायुक्त एवं शिवरात्रि महोत्सव समिति के अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने बड़ा देव कमरूनाग का विधिवत स्वागत कर पूजा-अर्चना की। इसके बाद राज माधोराय और बड़ा देव कमरूनाग का भव्य देव-मिलन हुआ, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर परिसर में गूंजती देवध्वनियों और श्रद्धा से भरे इस अलौकिक दृश्य ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

मंडी पहुंचने के उपरांत बड़ा देव कमरूनाग अब आगामी सात दिनों तक टारना माता मंदिर में विराजमान रहेंगे, जहां वे भक्तजनों को आशीर्वाद प्रदान करेंगे। देवता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया है और नगर में उत्सव की रौनक स्पष्ट दिखाई देने लगी है।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने कहा कि बड़ा देव कमरूनाग के आगमन के साथ ही शिवरात्रि महोत्सव के पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों की औपचारिक शुरुआत हो जाती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 16 से 22 फरवरी तक आयोजित होने वाले महोत्सव में जनपद भर से 216 देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया है। महोत्सव को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। उन्होंने आमजन से इस आस्था के महापर्व में भाग लेकर देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया।

इससे पूर्व पुलघराट में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला कमेटी द्वारा गठित स्वागत समिति ने बड़ा देव कमरूनाग का पारंपरिक वाद्य यंत्रों और रीति-रिवाजों के साथ भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर सर्व देवता समिति के प्रधान शिव पाल शर्मा, जिला राजस्व अधिकारी हरीश कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
बड़ा देव कमरूनाग के मंडी पहुंचते ही पूरी नगरी में उत्सव का वातावरण बन गया है। देव संस्कृति, आस्था और लोक परंपराओं का यह अद्भुत संगम आने वाले दिनों में अपने चरम पर होगा, जब छोटी काशी मंडी एक बार फिर देवी-देवताओं की अगवानी में पूरी तरह देवमय हो उठेगी।




























