फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार।
बंजार विधानसभा क्षेत्र में सड़कों की बदहाली अब बड़ा जनमुद्दा बनती जा रही है। पिछले लगभग पाँच महीनों से मौसम निर्माण कार्यों के लिए पूरी तरह अनुकूल रहने के बावजूद बरसात के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों के पुनरुद्धार का काम शुरू न होना प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार को लेकर जनता में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

बंजार और आउटर सिराज क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली NH-305 आज भी मरम्मत और सुधार कार्यों की प्रतीक्षा में है। बरसात के दौरान कई स्थानों पर सड़क को भारी नुकसान पहुंचा था और कई हिस्सों में यातायात भी प्रभावित हुआ था।
स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि मौसम खुलते ही सड़क सुधार का कार्य युद्धस्तर पर शुरू होगा, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इससे रोजाना सफर करने वाले लोगों, पर्यटकों और स्थानीय व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बंजार विधायक सुरेंद्र शौरी ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार विकास कार्यों को लेकर गंभीर नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश में सड़क परियोजनाओं के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाया है, लेकिन प्रदेश सरकार उस धनराशि का प्रभावी उपयोग करने में नाकाम साबित हो रही है।
उन्होंने कहा कि NH-305 के लिए प्रदेश सरकार द्वारा भेजी गई डीपीआर के अनुरूप आवश्यक बजट पहले ही स्वीकृत किया जा चुका है। इसके बावजूद सड़क सुधार और पुनर्निर्माण कार्यों की गति बेहद धीमी है, जो प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता को दर्शाती है। इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं बल्कि सरकारी संसाधनों का भी समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा।
शौरी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार अपने करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने में व्यस्त है, जबकि जनता से जुड़े बुनियादी विकास कार्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों का भी प्रदेश सरकार सही तरीके से उपयोग नहीं कर पा रही, जो शासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बंजार विधानसभा क्षेत्र की जनता अब सड़कों की बदहाली से त्रस्त हो चुकी है। यदि जल्द ही NH-305 और अन्य सड़कों के सुधार के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो जनता का यह आक्रोश बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।



























