फ्रंट पेज न्यूज़,बंजार।
दूध खरीद पर मिल्कफेड द्वारा निर्धारित 20 लीटर प्रतिदिन की सीमा को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इस मुद्दे पर किसान संगठनों और डेयरी उत्पादकों ने इसे किसानों की आय और डेयरी विकास पर सीधा प्रहार बताया है।
किसानों का कहना है कि जब सरकार और मिल्कफेड दूध खरीद के लिए 20 लीटर की सीमा तय करते हैं, तो यह ऐसा प्रतीत होता है मानो यह निर्धारित किया जा रहा हो कि किसान कितना आगे बढ़ सकता है। बेहतर नस्ल के पशु पालने, आधुनिक डेयरी तकनीकों को अपनाने तथा कड़ी मेहनत के बल पर उत्पादन बढ़ाने वाले किसानों को इस नीति से हतोत्साहित किया जा रहा है।

किसान नेताओं के अनुसार यह सीमा केवल दूध की मात्रा को ही सीमित नहीं करती, बल्कि किसानों के सपनों, युवाओं के रोजगार के अवसरों तथा महिला उद्यमियों की प्रगति की संभावनाओं को भी प्रभावित करती है। उनका कहना है कि यदि उत्पादन बढ़ाना ही समस्या माना जाएगा तो डेयरी विकास, स्वरोजगार और आत्मनिर्भर भारत जैसे दावों का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि दूध खरीद पर लगाई गई सीमा को तत्काल हटाया जाए तथा किसानों को उनके उत्पादन के अनुसार दूध बेचने का अवसर प्रदान किया जाए। किसानों का कहना है कि उनकी आमदनी कितनी होगी, यह सरकार नहीं बल्कि उनकी मेहनत और उत्पादन क्षमता तय करेगी।

इस मुद्दे को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन में क्षेत्र के सभी पंचायतवासियों, डेयरी उत्पादकों, युवाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों से भी जुड़ने का आह्वान किया गया है। किसानों ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि किसान हितों की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।







