फ्रंट पेज न्यूज डेस्क।
वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी हिस्से में स्थित एक महत्वपूर्ण देश है। इसकी राजधानी कराकास है। वेनेजुएला कैरेबियन सागर से सटा हुआ है और अपनी प्राकृतिक संपदा, विशेष रूप से पेट्रोलियम (तेल) के लिए विश्वभर में जाना जाता है।
यह देश एंजेल फॉल्स—दुनिया का सबसे ऊँचा झरना—, अमेज़न के घने जंगलों, पहाड़ों और समुद्री तटों के कारण भौगोलिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। वेनेजुएला लंबे समय तक लैटिन अमेरिका की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन हाल के वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट, महंगाई और सामाजिक चुनौतियों के कारण यह अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में रहा है।
संक्षेप में, वेनेजुएला प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध लेकिन वर्तमान समय में गंभीर आर्थिक-राजनीतिक संकट से जूझता हुआ देश है।
पिछले एक दशक में वेनेजुएला लगातार राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता से गुजरता रहा है। 2013 में ह्यूगो चावेज़ के बाद सत्ता में आए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के कार्यकाल में चुनावों की निष्पक्षता, मानवाधिकार उल्लंघन और विपक्ष के दमन को लेकर विवाद गहराते चले गए। 2018 के राष्ट्रपति चुनावों को अमेरिका और कई पश्चिमी देशों ने मान्यता नहीं दी, जिसके बाद वेनेजुएला पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए, खासकर तेल क्षेत्र और सरकारी कंपनी PDVSA पर। 2019 में विपक्षी नेता जुआन गुआइदो को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मान्यता देकर अमेरिका ने राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया। इन प्रतिबंधों और आंतरिक कुप्रबंधन के चलते देश में भारी महंगाई, खाद्य-दवा संकट और बड़े पैमाने पर पलायन हुआ, जिससे वेनेजुएला पहले से ही एक गहरे मानवीय संकट में फंस गया।

वेनेजुएला में चल रहा संकट अब एक अभूतपूर्व और अत्यंत गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को हुए अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी व प्रथम महिला सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया गया।

दोनों को राजधानी कराकास से विशेष विमान के जरिए अमेरिका ले जाया गया, जहां उन्हें न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। अमेरिका ने मादुरो पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं, हालांकि मादुरो पहले भी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं।

इस कार्रवाई के तुरंत बाद वेनेजुएला सरकार ने देश में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया और अमेरिका पर “सीधी सैन्य आक्रामकता” का आरोप लगाया। अमेरिकी हमलों में कराकास के सैन्य एयरबेस, ला गुएरा बंदरगाह और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाए जाने की पुष्टि हुई है। राजधानी कराकास में विस्फोटों, धुएं के गुबार, हेलीकॉप्टरों की उड़ान और दहशत में भागते लोगों के दृश्य सामने आए, जिससे आम नागरिकों में भय का माहौल बन गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि अमेरिका वेनेजुएला को “तब तक चलाएगा, जब तक वहां सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता परिवर्तन नहीं हो जाता।” ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला की “टूटी हुई अवसंरचना” को ठीक करेंगी और देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करेंगी। ट्रंप के इन बयानों को उनकी दूसरी पारी के उस वादे के उलट माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने युद्ध शुरू न करने, बल्कि उन्हें रोकने की बात कही थी।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला सरकार और उपराष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि मादुरो ही देश के एकमात्र वैध राष्ट्रपति हैं और यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है। वहीं कराकास के आम नागरिकों का कहना है कि वे “डर के बिना जीना चाहते हैं” और लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव तथा प्रतिबंधों ने उनकी जिंदगी को नरक बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकारों के अनुसार, अमेरिका का यह कदम बेहद विवादास्पद है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई के जरिए पकड़कर दूसरे देश में पेश करना अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत उचित नहीं ठहराया जा सकता। बिना संयुक्त राष्ट्र की अनुमति या आत्मरक्षा के स्पष्ट आधार के इस तरह की कार्रवाई को “सशस्त्र आक्रमण” माना जा सकता है। इसके साथ ही अमेरिका द्वारा वेनेजुएला को “चलाने” की बात को भी कानूनी रूप से अस्पष्ट और खतरनाक राजनीतिक हस्तक्षेप बताया जा रहा है।
कुल मिलाकर, वेनेजुएला का मौजूदा घटनाक्रम केवल सत्ता परिवर्तन या किसी एक नेता की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लैटिन अमेरिका की स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक शक्ति संतुलन के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह सैन्य हस्तक्षेप वेनेजुएला को स्थिरता की ओर ले जाता है या फिर देश और क्षेत्र को और गहरे संकट में धकेल देता है।
अमेरिकी कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उत्तर कोरिया ने इसे एक संप्रभु राष्ट्र पर “अवैध और साम्राज्यवादी आक्रमण” बताते हुए अमेरिका की कड़ी निंदा की और कहा कि यह कदम वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा है। रूस और चीन ने भी संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को उठाते हुए अमेरिकी कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया और वेनेजुएला की संप्रभुता के समर्थन की बात कही। वहीं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की अपील की। दूसरी ओर, कुछ अमेरिकी सहयोगी देशों ने लोकतंत्र और मानवाधिकारों का हवाला देते हुए अमेरिका के रुख का समर्थन किया, जिससे यह संकट अब वैश्विक शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है।


















