फ्रंट पेज न्यूज़ नई दिल्ली। आज देशभर में वीर बाल दिवस पूरे सम्मान और भावनात्मक गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्रस्तुत वंदे मातरम् की भावपूर्ण प्रस्तुति ने हर भारतीय के मन में देशभक्ति की लहर दौड़ा दी। इस कार्यक्रम के पीछे की निष्ठा, अनुशासन और कठोर परिश्रम ने यह स्पष्ट किया कि हमारी सांस्कृतिक परंपराएं आज भी राष्ट्रचेतना को ऊर्जा देती हैं।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने वीर बाल दिवस पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि वीर साहिबज़ादे भारत का गौरव हैं—वे अदम्य साहस, पराक्रम और सर्वोच्च बलिदान के प्रतीक हैं। उन्होंने स्मरण कराया कि कम आयु के बावजूद साहिबज़ादों ने मुग़ल शासन की क्रूरता और धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध चट्टान की तरह खड़े होकर इतिहास की दिशा बदल दी। उनका साहस उम्र और परिस्थितियों की सीमाओं से परे था, जिसने अत्याचार और आतंक की नींव तक को हिला दिया।
प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जिस राष्ट्र की जड़ों में ऐसे प्रेरक आदर्श हों, वह राष्ट्र अपने युवाओं के बल पर असंभव को भी संभव बना सकता है। वीर बाल दिवस केवल स्मृति का दिन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सत्य, साहस और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान है।
कार्यक्रम का आयोजन Ministry of Women and Child Development के सहयोग से किया गया, जिसमें बच्चों की प्रतिभा, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम का सशक्त प्रदर्शन देखने को मिला। इसी क्रम में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार और राष्ट्रीय बाल पुरस्कार जैसे मंचों के माध्यम से देश के होनहार बच्चों को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को और मजबूत किया गया।
वीर बाल दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की शक्ति उसकी युवा पीढ़ी में निहित है—और जब प्रेरणा साहिबज़ादों जैसे महान बलिदानकर्ताओं से मिले, तो राष्ट्र की प्रगति अवश्यंभावी हो जाती है।

















