फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार ।
क्षेत्र में आस्था, परंपरा और धार्मिक उल्लास का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब जल देवता वरुण देवता शिल अपने हरियानों और लाव-लश्कर के साथ पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और मांध्वनि के बीच चार वढ़ की पवित्र परिक्रमा (फेरी) पर निकले। लगभग 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देव आज्ञा से आयोजित यह परिक्रमा जन-जन की सुख, शांति और समृद्धि की कामना को समर्पित रही।
देव यात्रा का शुभारंभ 15 मार्च को चलाहण कोठी से हुई। प्रथम पड़ाव पर तांदी कोठी में देवता बालू नाग से भव्य मिलन हुआ। इसके पश्चात दूसरा पड़ाव लक्ष्मी नारायण देवता चेथर में संपन्न हुआ। यात्रा आगे बढ़ते हुए मंडी जिला की वालीचौकी क्षेत्र की ग्राम पंचायत धवेहड़ के शुरागी में देवता छाजणू से मिलन हुआ, जहां श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति देखने को मिली।
परिक्रमा के चौथे पड़ाव पर माता पांचाली के पुजाली स्थल में देव मिलन हुआ। छठे दिन खमारडा में विश्राम के बाद यात्रा ग्राम पंचायत बाहु पहुंची, जहां वाहु पंचायत के अधिष्ठाता देवता महाकाल पझारी से भव्य मिलन हुआ। इसके बाद आठवें दिन लक्ष्मी नारायण बेहलो तथा नवें दिन माता त्रिपुरा बाला सुंदरी और मार्कंडेय ऋषि के वला स्थित मंदिर में देव मिलन एवं विश्राम किया गया।
यात्रा के क्रम में आज देवता शिल के खालटू में रात्रि विश्राम के पश्चात कल प्रातः अपने मूल मंदिर चलाहण पहुंचेंगे, जहां एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इस दौरान जिन-जिन स्थानों पर देवता पहुंचे, वहां स्थानीय हरियानों और देवी-देवताओं के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार देव मिलन हुआ। श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव से देव परंपराओं का निर्वहन करते हुए क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
देवता के कारदार रणजीत सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह परिक्रमा लगभग 15 वर्षों बाद देव आज्ञा से आयोजित की गई है, जिसमें समस्त हरियानों ने मिलकर जनमानस के कल्याण हेतु चार वढ़ की यह पवित्र फेरी संपन्न की।


















