फ्रंट पेज न्यूज़ बंजार, (कुल्लू)
चैत्र नवरात्रों के पावन अवसर पर बंजार क्षेत्र के प्रसिद्ध अंबिका माता दुआला मंदिर में नौ दिनों तक चल रहे यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच अष्टमी और नवमी का पर्व विशेष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस दौरान पारंपरिक “दुआला जाच” का आयोजन हुआ, जिसमें क्षेत्र की समृद्ध देव संस्कृति की झलक देखने को मिली।
अष्टमी के शुभ अवसर पर पांच कोठी के आराध्य देव श्रृंगा ऋषि, गढ़पति लक्ष्मी नारायण (थनीचेड) तथा घटोत्कच देवता सिधबा अपने भव्य लाव-लश्कर और सैकड़ों हारियानों के साथ वाद्य यंत्रों की मधुर धुन पर दुआला मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में अंबिका माता के साथ देव मिलन का अद्भुत और भावुक दृश्य उपस्थित हुआ, जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
देवताओं के आगमन पर बंजार क्षेत्र के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहा, जहां ढोल-नगाड़ों और कर्णप्रिय वाद्य यंत्रों की थाप पर लोक नृत्य प्रस्तुत किए गए। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर अपनी आस्था और संस्कृति का उत्साहपूर्वक प्रदर्शन किया।


एनएसएस के वालंटियर जिन्होंने दुबाला जाच में 2 दिन सहभागिता के तौर पर अपनी सेवाएं दी
अष्टमी और नवमी के दौरान आयोजित दुआला जाच में आसपास के गांवों और दूरदराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य अर्जित किया।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और देव परंपराओं को भी जीवंत करने का एक सशक्त माध्यम बना। दुआला में आयोजित यह जाच हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धा, उल्लास और सामाजिक एकता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर गई।












